शासनादेश निरस्त करने की मांग पर अड़े
एटा/जलेसर। ई-पंजीकरण प्रणाली लागू किए जाने के विरोध में तहसील बार एसोसिएशन का धरना-प्रदर्शन मंगलवार को लगातार 16वें दिन भी जारी रहा। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि केवल आदेश वापस लेने से बात नहीं बनेगी, बल्कि उत्तर प्रदेश ऑनलाइन दस्तावेज रजिस्ट्रीकरण नियमावली-2024 में संशोधन अथवा उसे निरस्त किए जाने तक आंदोलन जारी रहेगा।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामेश्वर सिंह यादव और महासचिव द्विजेंद्र सिंह यादव ने बताया कि सोमवार को लखनऊ में महानिरीक्षक स्टांप एवं पंजीकरण के साथ हुई वार्ता में कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं ने महानिरीक्षक के आश्वासन को “लॉलीपॉप” करार देते हुए अस्वीकार कर दिया है।
उन्होंने बताया कि बार की ओर से आगरा सदर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष को वार्ता के लिए प्रतिनिधि बनाकर भेजा गया था। बैठक में प्रतिनिधिमंडल ने ई-पंजीकरण प्रणाली और उत्तर प्रदेश ऑनलाइन दस्तावेज रजिस्ट्रीकरण नियमावली-2024 से जुड़े कई बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराई।
अधिवक्ताओं ने 4 जून 2026 के ई-पंजीकरण संबंधी शासनादेश को वापस लेने, नियमावली की विभिन्न धाराओं को रजिस्ट्रेशन अधिनियम-1908 के प्रावधानों के विपरीत बताते हुए निरस्त करने, अधिवक्ताओं एवं दस्तावेज लेखकों की भूमिका स्पष्ट करने तथा ‘निबंधन मित्र’ भर्ती संबंधी आदेश समाप्त करने की मांग उठाई।
बार पदाधिकारियों के अनुसार, महानिरीक्षक निबंधन ने 29 जून 2026 को जारी पत्र के माध्यम से 4 जून 2026 का पूर्व आदेश वापस लिए जाने की जानकारी दी है। साथ ही नियमावली में संशोधन से संबंधित अन्य मांगों के संबंध में प्रमुख सचिव को प्रत्यावेदन भी भेजा गया है।
इसके बावजूद अधिवक्ताओं का कहना है कि जब तक उनकी सभी प्रमुख मांगों पर शासन स्तर से निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
धरना-प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने महामहिम राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन तहसीलदार संदीप सिंह को सौंपा। इस अवसर पर तहसील बार एसोसिएशन के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।








