अयोध्या के ऐतिहासिक सूर्यकुंड में सूर्यदेव के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित मेला रविवार को श्रद्धा और आस्था के माहौल में संपन्न हुआ। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु सूर्यकुंड पहुंचे और पवित्र स्नान, ध्यान तथा पूजन-अर्चन के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देकर दर्शन किए। नव्य अयोध्याधाम में विकसित किए गए सूर्यकुंड की भव्य लाइटिंग, दिव्य सूर्यद्वार और शाम के समय होने वाला थ्रीडी लेजर शो भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।
मेले में धार्मिक आस्था के साथ लोगों के मनोरंजन का भी इंतजाम देखने को मिला। सूर्यकुंड परिसर के बाहर तरह-तरह के झूले लगे थे, वहीं नृत्य, संगीत, कला और जादू के कार्यक्रमों ने बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक का मनोरंजन किया। श्रद्धालु पूजा-पाठ के बाद परिवार के साथ मेले का आनंद लेते नजर आए। देर रात तक परिसर में चहल-पहल बनी रही और पूरा क्षेत्र धार्मिक उत्सव के रंग में नजर आया।
अयोध्या के चौदह कोसी परिक्रमा क्षेत्र में स्थित सूर्यकुंड को हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण तीर्थस्थल माना जाता है। मान्यता है कि इसकी स्थापना सूर्यवंशी भगवान श्रीराम के वंशजों से जुड़ी है और राजा दर्शन को इसकी स्थापना का श्रेय दिया जाता है। यहां सूर्यदेव की प्राचीन प्रतिमा स्थापित है। कार्तिक पूर्णिमा, परिक्रमा, चैत्र रामनवमी और सावन झूला जैसे अवसरों पर भी दूर-दराज से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। समय के साथ आवागमन की सुविधाएं बढ़ने के कारण पहले कई दिनों तक चलने वाला यह मेला अब मुख्य रूप से एक दिन का रह गया है।
हनुमानगढ़ी से जुड़े संतों और महंतों के अनुसार सूर्यकुंड में स्नान, पूजन और सूर्यदेव के दर्शन को लेकर लोगों में गहरी आस्था है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और धार्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है। कुछ मान्यताओं में सूर्यकुंड स्नान को चर्म रोगों से राहत से भी जोड़ा जाता है। धार्मिक आस्था, पारंपरिक मान्यताओं और आधुनिक सुविधाओं के संगम ने सूर्यकुंड मेले को अयोध्या के प्रमुख आकर्षणों में शामिल कर दिया है।





















