एसपी सिंह ब्यूरो चीफ
अमेठी। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने, कृषि में विविधीकरण को बढ़ावा देने तथा युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि प्रदेश का किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ उद्यानिकी एवं आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर अपनी आय में कई गुना वृद्धि करे। इसी सोच को धरातल पर उतारने के लिए जनपद अमेठी में जिलाधिकारी संजय चौहान के मार्गदर्शन एवं निर्देशन तथा जिला उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से किसानों को उद्यान विभाग की योजनाओं से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। इन्हीं प्रयासों का एक प्रेरणादायक उदाहरण विकास खण्ड सिंहपुर के ग्राम बतिया निवासी प्रगतिशील कृषक फुरकान खान हैं, जिन्होंने एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच) योजना का लाभ लेकर बटन मशरूम की खेती में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। आज उनकी सफलता न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।
योजना से मिली नई दिशा
फुरकान खान लंबे समय से खेती-किसानी से जुड़े रहे हैं। पारंपरिक खेती में बढ़ती लागत और सीमित लाभ के कारण वे ऐसी कृषि गतिविधि की तलाश में थे, जिससे कम भूमि में अधिक आय अर्जित की जा सके। इसी दौरान उन्हें उद्यान विभाग द्वारा संचालित एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच) योजना की जानकारी प्राप्त हुई। विभागीय अधिकारियों ने उन्हें मशरूम उत्पादन की संभावनाओं, बाजार की मांग तथा योजना के अंतर्गत उपलब्ध सुविधाओं के बारे में विस्तार से बताया। उद्यान विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने योजना में ऑनलाइन पंजीकरण कराया और आवश्यक स्वीकृति प्राप्त करने के बाद बटन मशरूम उत्पादन इकाई स्थापित करने का निर्णय लिया। विभागीय तकनीकी सहयोग और समय-समय पर दिए गए प्रशिक्षण ने उन्हें इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास प्रदान किया।
200 वर्गमीटर में तैयार की आधुनिक मशरूम इकाई
योजना के अंतर्गत फुरकान खान ने लगभग 200 वर्गमीटर क्षेत्रफल में छप्परयुक्त संरचना का निर्माण कराया। संरचना निर्माण, श्रम एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर लगभग 4 लाख रुपये की लागत आई। मशरूम उत्पादन के लिए नियंत्रित वातावरण की आवश्यकता होती है, इसलिए उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से उत्पादन इकाई विकसित की। निर्माण कार्य पूर्ण होने के लगभग दो माह बाद ही मशरूम का उत्पादन प्रारम्भ हो गया। उचित तापमान, नमी तथा वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण उनकी इकाई में गुणवत्तापूर्ण बटन मशरूम का उत्पादन होने लगा। उन्होंने विभागीय विशेषज्ञों द्वारा दिए गए सुझावों का पालन करते हुए उत्पादन की पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से संचालित किया।
कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन
फुरकान खान की मशरूम इकाई में माह अगस्त से फरवरी तक नियमित उत्पादन होता है। इस अवधि में प्रति सप्ताह लगभग 50 से 75 किलोग्राम बटन मशरूम का उत्पादन प्राप्त हुआ। लगातार देखभाल और वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग से उन्होंने पूरे सीजन में लगभग 100 कुंतल मशरूम का उत्पादन किया। मशरूम की बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने अपने उत्पाद का विपणन स्थानीय बाजार तक सीमित न रखते हुए विभिन्न जनपदों में किया। उनके द्वारा उत्पादित मशरूम की बिक्री लखनऊ, रायबरेली, अयोध्या और सुलतानपुर जैसे प्रमुख बाजारों में की गई, जहां उन्हें उत्पाद का अच्छा मूल्य प्राप्त हुआ।
6 लाख रुपये का शुद्ध लाभ
मशरूम उत्पादन और विपणन के बेहतर प्रबंधन के कारण फुरकान खान को इस उद्यम से उल्लेखनीय आर्थिक सफलता मिली। उत्पादन लागत और अन्य खर्चों को निकालने के बाद उन्हें लगभग 6 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। यह लाभ पारंपरिक खेती की तुलना में कहीं अधिक रहा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह आय अपेक्षाकृत कम क्षेत्रफल में प्राप्त हुई, जिससे यह सिद्ध होता है कि आधुनिक कृषि एवं उद्यानिकी आधारित गतिविधियां किसानों के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकती हैं। मशरूम उत्पादन ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया बल्कि परिवार के लिए रोजगार और स्थायी आय का स्रोत भी उपलब्ध कराया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार किसानों की आय दोगुनी करने, कृषि को लाभकारी बनाने तथा युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने पर विशेष बल दे रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। फुरकान खान की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि किसान सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर नई तकनीकों को अपनाएं तो सीमित संसाधनों में भी बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं। उनकी उपलब्धि मुख्यमंत्री की उस सोच को साकार करती है, जिसमें कृषि को उद्यम के रूप में विकसित कर किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जनपद अमेठी में जिलाधिकारी संजय चौहान के निर्देशन में किसानों तक विभिन्न योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने, किसानों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराने तथा योजनाओं की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। जिलाधिकारी के मार्गदर्शन में संबंधित विभागों द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक किसान उद्यानिकी आधारित व्यवसाय अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें। फुरकान खान की सफलता इसी प्रयास का सकारात्मक परिणाम है। जिला उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह के नेतृत्व में उद्यान विभाग द्वारा किसानों को योजनाओं से जोड़ने, तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करने तथा समय-समय पर प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का कार्य प्रभावी ढंग से किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों की सक्रियता और निरंतर सहयोग के कारण जनपद में मशरूम, सब्जी, फल एवं अन्य उद्यानिकी फसलों के प्रति किसानों की रुचि बढ़ी है। फुरकान खान को भी योजना की जानकारी देने से लेकर ऑनलाइन पंजीकरण, स्वीकृति, तकनीकी परामर्श तथा उत्पादन संबंधी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया, जिसके परिणामस्वरूप वे इस क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सके। आज फुरकान खान की सफलता की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। आसपास के किसान उनकी मशरूम इकाई का अवलोकन कर रहे हैं और इस व्यवसाय को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि यदि सही योजना, आधुनिक तकनीक और विभागीय मार्गदर्शन का समुचित उपयोग किया जाए तो कम भूमि में भी बेहतर आय अर्जित की जा सकती है। फुरकान खान की यह प्रेरक यात्रा दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं और कृषि को लाभकारी व्यवसाय में परिवर्तित कर सकते हैं। उनकी सफलता निश्चित रूप से जनपद अमेठी के अन्य किसानों को भी नवाचार आधारित खेती अपनाने और आर्थिक समृद्धि की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रहेगी।








