जन्मशती संगोष्ठी में गूंजी वैचारिक पत्रकारिता की जरूरत, बीएचयू में शोधपीठ बनाने की घोषणा
बलिया। पूर्व प्रधानमंत्री और प्रखर पत्रकार स्वर्गीय चंद्रशेखर की जन्मशती वर्ष पर गुरुवार को नगर के टाउन हॉल में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश की वैचारिक पत्रकारिता, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक सरोकारों पर गंभीर विमर्श हुआ। ‘यंग इंडियन’ के संपादक रहे चंद्रशेखर की पत्रकारिता दृष्टि को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आज देश को फिर से चंद्रशेखर जैसे निर्भीक, वैचारिक और जनपक्षधर पत्रकारों की आवश्यकता है। कार्यक्रम में उनकी पत्रकारिता, वैचारिक प्रतिबद्धता और सामाजिक दृष्टि को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बताया गया।
मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन ने कहा कि चंद्रशेखर की पत्रकारिता ने देश में एक नई वैचारिक लकीर खींची थी। ‘यंग इंडियन’ केवल एक पत्रिका नहीं, बल्कि उस दौर के भारत की बेचैनी और बदलाव की आवाज थी। उन्होंने कहा कि विचार और समाचार दोनों अलग-अलग चीजें हैं, लेकिन चंद्रशेखर ने पत्रकारिता को विचार की ऊंचाई प्रदान की। उनके लेखों पर पूरा देश सोचता था। आज वैचारिक पत्रकारिता कमजोर होती जा रही है और समाज ऐसे पत्रकारों व नेताओं की कमी महसूस कर रहा है।
गांधी के स्वराज की झलक थी उनकी पत्रकारिता में
कार्यक्रम के दूसरे सत्र ‘चंद्रशेखर की पत्रकारिता दृष्टि’ में अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के प्रोफेसर एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ. कृपाशंकर चौबे ने बीज वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रारंभ में ‘यंग इंडियन’ का संपादन अंग्रेजी में हुआ, लेकिन बाद में चंद्रशेखर ने वर्षों तक इसका हिंदी संपादन किया। उनकी पत्रकारिता में महात्मा गांधी के स्वराज की स्पष्ट झलक दिखाई देती थी।
डॉ. चौबे ने कहा कि चंद्रशेखर के लेखन में कुपोषण, बेरोजगारी और समाज के अंतिम व्यक्ति की पीड़ा प्रमुख विषय होते थे। संसद में भी वे इन्हीं मुद्दों को बेबाकी से उठाते रहे। उन्होंने ‘मेरी जेल डायरी’ का उल्लेख करते हुए कहा कि जवाहरलाल नेहरू के बाद चंद्रशेखर देश के सबसे अध्ययनशील प्रधानमंत्रियों में थे। उनकी लेखनी में किसी प्रकार का विभेद नहीं था और वे वैचारिक पत्रकारिता के शिखर पुरुष थे।
उन्होंने 1975 में ‘यंग इंडियन’ में प्रकाशित एक लेख का जिक्र करते हुए कहा कि बेरोजगारी पर उस समय लिखी गई बातें आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।
सत्ता से सवाल करने का साहस रखते थे चंद्रशेखर
लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह ने कहा कि चंद्रशेखर की पत्रकारिता सत्ता से सवाल करने वाली पत्रकारिता थी। वे कभी सत्ता के सामने झुके नहीं और उन्होंने अपने जीवन में किसी खबर का खंडन करने की नौबत नहीं आने दी। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर ऐसे पत्रकार थे जिन्होंने आगे चलकर राजनेता के रूप में भी देश को दिशा दी।
वरिष्ठ पत्रकार धीरेंद्रनाथ श्रीवास्तव ने कहा कि चंद्रशेखर की पत्रकारिता का केंद्र गरीब, किसान और बेरोजगार थे। कठिन से कठिन बात को सरल शब्दों में रखने का अद्भुत कौशल उनमें था। उन्होंने कहा कि देश में हुई कुछ घटनाओं ने उन्हें पत्रकारिता से दूर जरूर किया, लेकिन पत्रकारिता को लेकर उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। आज के पत्रकार उनसे बहुत कुछ सीख सकते हैं।
बीएचयू में बनेगी चंद्रशेखर के नाम पर शोधपीठ
बीएचयू पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डॉ. ज्ञानप्रकाश मिश्र ने कहा कि भारत में पत्रकारिता का उदय देश की गुलामी के दौर में हुआ और चंद्रशेखर ने पत्रकारिता को नई दिशा देने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि उनकी पत्रकारिता समदृष्टि वाली थी और वे सनातनी समाजवादी चिंतन के प्रतिनिधि थे। ग्राम्य जीवन, सांस्कृतिक विरासत और भारतीय मूल्यों से उनका गहरा लगाव था।
उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर समझौतावादी नहीं थे और उनमें प्रलोभन का कोई स्थान नहीं था, जो किसी सच्चे पत्रकार का सबसे बड़ा गुण होता है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने ऊंचाइयों को छुआ। डॉ. मिश्र ने घोषणा की कि बीएचयू के पत्रकारिता विभाग में चंद्रशेखर के नाम पर शोधपीठ स्थापित करने की पहल की जाएगी, ताकि उनके विचारों और मूल्यों पर गंभीर अध्ययन हो सके।
अतिथियों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम का शुभारंभ स्व. चंद्रशेखर के चित्र पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। राज्यसभा सांसद नीरज शेखर और एमएलसी रविशंकर सिंह ‘पप्पू’ ने वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन, डॉ. कृपाशंकर चौबे, डॉ. ज्ञानप्रकाश मिश्र और धीरेंद्रनाथ श्रीवास्तव को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर श्याम जी त्रिपाठी, योगेंद्र सिंह, कमलेश सिंह, राणा प्रताप सिंह, नपा चेयरमैन संत कुमार मिठाई लाल गुप्त, चंद्रशेखर सिंह, यशपाल सिंह, मनोरंजन सिंह, अजय उपाध्याय, उमाशंकर सिंह, सुशील कुमार पांडेय ‘कान्ह जी’, अरविंद शुक्ल समेत अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता चंद्रशेखर जन्मशती वर्ष समारोह समिति के अध्यक्ष श्यामबहादुर सिंह ने की, जबकि संचालन वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अखिलेश सिन्हा ने किया। अतिथियों का स्वागत पूर्व प्रमुख अनिल सिंह ने किया।




