चीन में भी महसूस हुए कंपन
ल्हासा/तिब्बत। तिब्बत में गुरुवार, 22 अक्तूबर की रात भूकंप के तेज झटकों से धरती कांप उठी। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार, क्षेत्र में रिक्टर पैमाने पर 7.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इसके बाद करीब चार घंटे के दौरान 4.3 से 5.2 तीव्रता तक के 15 और झटके रिकॉर्ड किए गए। लगातार भूकंपीय गतिविधियों के कारण क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया। चीन के कुछ इलाकों में भी भूकंप के झटके दर्ज किए गए।
एनसीएस की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 22 अक्तूबर की रात 8 बजकर 3 मिनट पर 7.0 तीव्रता का सबसे शक्तिशाली भूकंप आया। इसके महज 26 मिनट बाद रात 8 बजकर 29 मिनट पर 5.2 तीव्रता का एक और झटका दर्ज किया गया। इसके बाद भी धरती के कांपने का सिलसिला जारी रहा। रात 8 बजकर 42 मिनट पर 5.0 तीव्रता का भूकंप आया। रात 9 बजकर 9 मिनट और 9 बजकर 15 मिनट पर भी 5.0 तीव्रता के झटके रिकॉर्ड किए गए।
इसके बाद रात 9 बजकर 27 मिनट पर चीन में 5.0 तीव्रता का झटका दर्ज हुआ। रात 9 बजकर 47 मिनट से 10 बजकर 40 मिनट के बीच तिब्बत और आसपास के क्षेत्र में 4.6 से 4.9 तीव्रता तक के कई झटके महसूस किए गए। रात 11 बजकर 17 मिनट पर 4.3 तीव्रता, 11 बजकर 36 मिनट पर 4.8 तीव्रता और 11 बजकर 55 मिनट पर 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। 23 अक्तूबर की रात 12 बजकर 1 मिनट पर 4.3 तीव्रता का एक और झटका रिकॉर्ड हुआ।
एनसीएस के उपलब्ध आंकड़ों में कुल 16 भूकंपीय घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें मुख्य भूकंप के बाद आए झटके भी शामिल हैं। हालांकि, भूकंप से हुए संभावित नुकसान और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
पहले भी भूकंप की मार झेल चुका है तिब्बत
तिब्बत में भूकंप की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। तीन सितंबर को इस क्षेत्र में 5.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। उस समय भूकंप का केंद्र 31.479 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 80.370 डिग्री पूर्वी देशांतर पर बताया गया था। इसकी गहराई जमीन से लगभग 14 किलोमीटर नीचे थी।
इससे पहले अगस्त में ग्लेशियर टूटने के बाद तिब्बत के कुछ इलाकों में प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ी घटनाएं सामने आई थीं। इसके बाद बाढ़ से भी क्षेत्र प्रभावित हुआ था। ऐसे में ताजा भूकंप ने क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
जनवरी 2025 में भी आया था विनाशकारी भूकंप
तिब्बत में जनवरी 2025 में भी शक्तिशाली भूकंप आया था। उस दौरान 6.8 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, इस आपदा में 120 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। बड़ी संख्या में इमारतों और अन्य संरचनाओं को भी नुकसान पहुंचा था।
लगातार भूकंप आने के कारण इस क्षेत्र की भूगर्भीय गतिविधियों पर वैज्ञानिकों की नजर बनी रहती है। हालांकि, किसी क्षेत्र में बार-बार झटके आने से हर बार बड़े नुकसान की आशंका नहीं होती। वास्तविक स्थिति का आकलन भूकंप की गहराई, केंद्र से दूरी, स्थानीय भूगर्भीय संरचना और इमारतों की मजबूती जैसे कारकों के आधार पर किया जाता है।
क्यों आते हैं भूकंप?
पृथ्वी की बाहरी परत कई बड़ी और छोटी टेक्टोनिक प्लेटों में विभाजित है। ये प्लेटें लगातार गति करती रहती हैं। जब प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं, दूर खिसकती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो चट्टानों में तनाव जमा हो सकता है। तनाव एक सीमा से अधिक होने पर चट्टानों में अचानक हलचल होती है और ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में बाहर निकलती है। इसी से धरती की सतह पर कंपन महसूस होता है।
भूकंप का सबसे अधिक प्रभाव सामान्यतः उसके केंद्र के आसपास के क्षेत्रों में पड़ सकता है, लेकिन शक्तिशाली भूकंप के झटके काफी दूर तक महसूस किए जा सकते हैं। नुकसान की मात्रा केवल तीव्रता पर निर्भर नहीं करती, बल्कि भूकंप की गहराई, स्थानीय जमीन की प्रकृति और निर्माण की गुणवत्ता भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता?
भूकंप की तीव्रता और उससे होने वाले प्रभाव को समझने के लिए वैज्ञानिक अलग-अलग मापों का इस्तेमाल करते हैं। रिक्टर पैमाना ऐतिहासिक रूप से भूकंप के परिमाण को मापने के लिए इस्तेमाल किया गया है, जबकि आधुनिक भूकंप विज्ञान में बड़े भूकंपों के लिए मोमेंट मैग्नीट्यूड स्केल का भी व्यापक उपयोग होता है। भूकंप के झटकों की वास्तविक तीव्रता अलग-अलग स्थानों पर अलग हो सकती है, क्योंकि यह स्थानीय परिस्थितियों और भूकंप के केंद्र से दूरी पर निर्भर करती है।
तिब्बत में आए ताजा भूकंप के बाद लगातार दर्ज किए गए झटकों ने क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी है। हालांकि, प्रभावित इलाकों में जान-माल के नुकसान की पुष्टि के लिए संबंधित एजेंसियों की आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है।





















