विपक्षी सांसदों का चुनाव आयोग तक मार्च, पुलिस ने रोका; राहुल के हाथ में था ‘ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो’ पोस्टर
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध प्रदर्शन मंगलवार को लगातार पांचवें दिन जारी रहा। INDIA ब्लॉक के सांसदों ने संसद परिसर से चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च निकाला। विपक्षी दल SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
मार्च के दौरान पुलिस ने विपक्षी सांसदों को आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी नेता सड़क पर बैठ गए और चुनाव आयोग तक जाने की मांग पर अड़े रहे। चुनाव आयोग कार्यालय के आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था और बैरिकेडिंग की गई थी।
प्रदर्शन में सांसदों ने ‘Save Democracy’ के बैनर लेकर नारे लगाए। राहुल गांधी के हाथ में ‘Gyanesh, It’s Done Bro’ लिखा पोस्टर भी नजर आया। विपक्ष का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।
SIR में 13 करोड़ नाम हटाने का विपक्ष का आरोप
विपक्षी दलों का दावा है कि SIR की प्रक्रिया के दौरान देशभर में करीब 13 करोड़ नाम मतदाता सूचियों से हटाए गए हैं। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग की प्रक्रिया और पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, चुनाव आयोग SIR को मतदाता सूची को अपडेट करने और अपात्र, मृत या डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया बताता है। आयोग से जुड़े निर्णयों को लेकर भी विपक्ष और निर्वाचन आयोग के बीच मतभेद सामने आए हैं।
पांच दिनों में पांचवां प्रदर्शन
विपक्षी दलों की ओर से 2 अक्टूबर से दिल्ली में CEC और SIR के खिलाफ प्रदर्शन किए जा रहे हैं। मंगलवार का प्रदर्शन पांचवें दिन हुआ। इससे पहले भी दिल्ली और अन्य शहरों में विपक्षी दलों ने विरोध मार्च और प्रदर्शन किए थे। 6 अक्टूबर के मार्च के मद्देनजर दिल्ली में कई स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाई गई और यातायात में बदलाव किए गए।
विपक्षी सांसदों का कहना है कि वे मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और SIR से जुड़े सवालों को लेकर चुनाव आयोग के सामने अपनी बात रखना चाहते हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ पक्ष विपक्ष के आरोपों से असहमति जताते रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट में भी मामला पहुंचा
SIR और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। अदालत में दायर याचिकाओं में चुनाव आयोग की प्रक्रिया, फॉर्म-6 और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए गए हैं। 13 करोड़ नाम हटाए जाने का आंकड़ा याचिकाओं और विपक्षी दावों में सामने आया है।





















