वर्ष में चार बार नवरात्रि आती है। इसमें एक चैत्र नवरात्रि दूसरा शारदीय नवरात्रि और दो गुप्त नवरात्रि। गुप्त नवरात्रि में 9 दिन तंत्र-मंत्र और साधना के लिए महत्वपूर्ण है। इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से 23 जुलाई तक है । यह समय देवी दुर्गा के नौ रूपों की आराधना के लिए उत्तम माना जाता है. इन दिनों की साधना से नकारात्मक ऊर्जाओं, ग्रह दोषों और नजर दोष से राहत मिलती है गुप्त नवरात्र के दौरान कई साधक महाविद्या (तंत्र साधना) के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुरा भैरवी, मां धूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं।
– ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ
तंत्र साधना के लिए विशेष महत्व
गुप्त नवरात्रि को तांत्रिक साधना का विशेष काल माना जाता है। इस दौरान अनेक साधक दशमहाविद्याओं की उपासना करते हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- मां काली
- मां तारा
- त्रिपुर सुंदरी (षोडशी)
- मां भुवनेश्वरी
- मां छिन्नमस्ता
- मां त्रिपुरा भैरवी
- मां धूमावती
- मां बगलामुखी
- मां मातंगी
- मां कमला
की पूजा और साधना की जाती है।
मां दुर्गा की आराधना का श्रेष्ठ समय
गुप्त नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु व्रत, जप, हवन, दुर्गा सप्तशती का पाठ और देवी मंत्रों का जाप करते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से की गई देवी उपासना से जीवन में सुख-समृद्धि, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल ने बताया कि गुप्त नवरात्रि में साधना सदैव योग्य गुरु के मार्गदर्शन और शास्त्रसम्मत विधि से ही करनी चाहिए। सामान्य श्रद्धालु देवी दुर्गा की भक्ति, मंत्र जाप, पाठ और पूजा-अर्चना के माध्यम से भी मां की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।








