16 जुलाई को कर्क संक्रांति: सूर्य का होगा कर्क राशि में प्रवेश, दक्षिणायन की होगी शुरुआत
लखनऊ। 16 जुलाई को सूर्य देव मिथुन राशि से निकलकर रात्रि 11:45 बजे कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को कर्क संक्रांति या श्रावण संक्रांति कहा जाता है। इसी के साथ सूर्य का दक्षिणायन प्रारंभ हो जाएगा और छह महीने तक चलने वाले उत्तरायण का समापन होगा।
ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल (स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ) के अनुसार, कर्क संक्रांति से देवताओं की रात्रि आरंभ मानी जाती है। सूर्य के दक्षिण की ओर गमन के कारण उत्तरी गोलार्ध में दिन छोटे और रातें लंबी होने लगती हैं। सनातन परंपरा में इस संक्रांति का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है।
भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व
कर्क संक्रांति के दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान, ध्यान, जप, तप और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव की आराधना करने से सुख, समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
पुण्यकाल में करें दान-पुण्य
ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल के अनुसार, 16 जुलाई को पुण्यकाल दोपहर 12:27 बजे से शाम 7:21 बजे तक रहेगा। इस अवधि में पूजा-पाठ, जप, हवन और दान करना विशेष फलदायी माना गया है।
इन वस्तुओं का करें दान
कर्क संक्रांति के अवसर पर श्रद्धानुसार निम्न वस्तुओं का दान शुभ माना गया है—
- गेहूं और अन्य अनाज
- गुड़
- तांबे के बर्तन
- वस्त्र
- फल
- तिल
- छाता
- धन एवं अन्य आवश्यक वस्तुएं
पितरों के लिए तर्पण का भी विशेष महत्व
इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध करने का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे पितरों की आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है तथा परिवार को पितृदोष से मुक्ति मिलने का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल ने बताया कि कर्क संक्रांति पर प्रातःकाल सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित कर श्रद्धापूर्वक पूजा करने और दान-पुण्य करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शुभ ऊर्जा का संचार होता है।
– – ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ








