चंपत राय की निगरानी पर उठे प्रश्न
अयोध्या/लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की विस्तृत रिपोर्ट बुधवार को सरकार को सौंपी जा सकती है। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में मंदिर प्रबंधन की भर्ती प्रक्रिया और सुरक्षा संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में की गई ढील को चोरी की प्रमुख वजह माना गया है। वहीं, तत्कालीन ट्रस्ट महासचिव चंपत राय की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार रिपोर्ट में चंपत राय को आपराधिक साजिश में शामिल नहीं बताया गया है, लेकिन प्रबंधन में लापरवाही और निगरानी की कमी के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराए जाने के संकेत हैं। इस संबंध में आधिकारिक रूप से रिपोर्ट सार्वजनिक होना अभी बाकी है।
भर्ती प्रक्रिया और SOP में ढील बनी बड़ी वजह
सूत्रों के मुताबिक SIT ने पाया कि चढ़ावे की गणना में ऐसे आउटसोर्स कर्मचारियों को लगाया गया, जो मूल रूप से हाउसकीपिंग कार्य के लिए नियुक्त थे। जांच में यह भी सामने आया कि भर्ती प्रक्रिया में स्थापित नियमों का पर्याप्त पालन नहीं किया गया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सुरक्षा और निगरानी से जुड़ी SOP में बदलाव किए जाने से चोरी की संभावना बढ़ी।
अनिल मिश्रा की भूमिका पर भी सवाल
सूत्रों के अनुसार, SIT ने रिपोर्ट में ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा की भूमिका को सबसे अधिक जिम्मेदार माना है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष और संभावित कार्रवाई सरकार तथा पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
टिन्नू यादव की भूमिका हुई और स्पष्ट
जांच में टिन्नू यादव की भूमिका भी पहले से अधिक स्पष्ट होने की बात सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, भले ही वह ट्रस्ट के आधिकारिक प्रशासनिक ढांचे का हिस्सा नहीं था, लेकिन उसे मंदिर प्रबंधन की कई संवेदनशील जानकारियों तक पहुंच थी।
बताया जा रहा है कि उसके पास हुंडियों की चाबियां भी रहती थीं और वह कई प्रशासनिक मामलों में प्रभावी भूमिका निभाता था।
पुलिस जांच अभी जारी
SIT ने अपनी रिपोर्ट में आपराधिक साजिश पर अंतिम टिप्पणी नहीं की है, क्योंकि मामले की पुलिस विवेचना अभी जारी है। ऐसे में किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
पहले भी की गई थीं अहम सिफारिशें
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में एफआईआर दर्ज करने और मंदिर प्रशासन में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति जैसी सिफारिशें की गई थीं, जिन पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है।








