वाराणसी स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिंदू विश्वविद्यालय), आईआईटी बीएचयू के शोधकर्ताओं ने वैश्विक स्तर पर संस्थान का नाम रोशन किया है। स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर की वर्ष 2026 की विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में संस्थान के 57 शोधकर्ताओं को जगह मिली है। इनमें 33 शोधकर्ता अपने करियर के समग्र शोध प्रभाव के आधार पर शामिल किए गए हैं, जबकि 57 शोधकर्ताओं को वर्ष 2025 के शोध प्रभाव के आधार पर तैयार सूची में स्थान मिला है।
एल्सेवियर के डेटा रिपॉजिटरी में 7 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित इस सूची को स्कोपस (Scopus) के उद्धरण डेटा के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें शोधकर्ताओं के शोध पत्रों को मिले उद्धरण, एच-इंडेक्स, सह-लेखक और शोध पत्रों में उनके लेखकीय योगदान जैसे मानकों को ध्यान में रखा जाता है। एक वर्ष के शोध प्रभाव वाली सूची में वर्ष 2025 के दौरान शोधकर्ताओं के कार्यों के उद्धरण प्रभाव को आधार बनाया गया है।
आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता जताई और सूची में शामिल सभी शोधकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान संस्थान के शिक्षकों की उच्च गुणवत्ता वाले शोध और प्रभावशाली नवाचार के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उनके अनुसार, शोधकर्ताओं का योगदान संस्थान की शोध उत्कृष्टता और वैश्विक शैक्षणिक प्रतिष्ठा को मजबूत करता है।
संस्थान के 57 शोधकर्ताओं को मिली यह पहचान विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में उनके शोध कार्यों के योगदान को रेखांकित करती है। साथ ही, यह उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक और शोध जगत में आईआईटी बीएचयू की पहचान को भी दर्शाती है। सूची में शामिल शोधकर्ताओं के कार्यों को मिले वैश्विक उद्धरण उनके शोध प्रभाव के आकलन का एक महत्वपूर्ण आधार हैं।





















