लखनऊ के सरोजनीनगर स्थित लतीफ नगर राजकीय महाविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ. आरपी वर्मा ने चिकित्सा अवकाश समय से स्वीकृत नहीं किए जाने और वेतन बाधित होने का आरोप लगाया है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा और उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. मोनिका सिंह को शिकायती पत्र भेजकर मामले की जांच और कॉलेज की प्राचार्या डॉ. सुषमा देवी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
डॉ. वर्मा के अनुसार, वह 7 से 25 सितंबर 2026 तक 19 दिन चिकित्सा अवकाश पर रहे। 26 सितंबर को स्वस्थ होने के बाद उन्होंने कॉलेज में कार्यभार ग्रहण किया और अवकाश प्रार्थना पत्र के साथ मेडिकल प्रमाणपत्र की मूल प्रतियां कार्यालय में जमा कर दीं। उनका कहना है कि प्रमाणपत्र का मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) स्तर से प्रतिहस्ताक्षरित होना अपेक्षित था, लेकिन कॉलेज कार्यालय ने इसे सीएमओ के समक्ष प्रस्तुत कराने के बजाय 28 सितंबर को पत्र संख्या 239/2026-27 के माध्यम से बलरामपुर अस्पताल, लखनऊ के निदेशक/मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को स्पीड पोस्ट से भेज दिया।
प्रोफेसर का आरोप है कि चिकित्सा प्रमाणपत्र के सत्यापन की प्रक्रिया में देरी होने के कारण उनका वेतन समय से जारी नहीं हो सका। उन्होंने शिकायत में कहा कि यदि प्रमाणपत्र में कोई कमी थी या अतिरिक्त सत्यापन की आवश्यकता थी तो उन्हें इसकी जानकारी देकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सकती थी। डॉ. वर्मा ने इस पूरी प्रक्रिया से आर्थिक और मानसिक परेशानी होने की बात कही है।
डॉ. वर्मा ने प्राचार्या पर प्रताड़ना, पूर्वाग्रह और दूषित मंशा से कार्रवाई करने का आरोप भी लगाया है। शिकायत में उन्होंने बताया कि वह करीब 20 वर्षों से मधुमेह से पीड़ित हैं और इलाज में काफी खर्च होता है। उनका कहना है कि आर्थिक और पारिवारिक कठिनाइयों के बीच तनाव बढ़ने से उनकी बीमारी भी प्रभावित हुई है। उन्होंने शासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।





















