497 स्थानों से उठा ताजिया, कर्बला में हुए ठंडे
युवाओं ने लकड़ी के खेल का दिखाया हैरतअंगेज करतब
चंदौली। जिले में मुहर्रम शुक्रवार को गम और मातम के बीच मनाया गया। इस दौरान शहीद-ए-कर्बला की याद में पूरे जिले में ताजिया के जुलूस निकाले गए। पूरे जिले में 497 इमाम चौकों से ताजिया उठाकर कर्बला पहुंचाया गया। यहां ताजिये ठंडे किए गए। ताजिया जुलूस में या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं। जुलूस में अलग-अलग अंजुमनों व अखाड़ों की ओर से करतब दिखाए गए। शिया समुदाय के लोगों ने जंजीरी मातम किया। जुलूस के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे।
नगर के कसाब महाल, काली महाल, मुस्लिम महाल, मंसूर सलाम रोड, जीटी रोड, शाहकुटी, महमूदपुर, पथरा, सिकटिया, गोबरियां, प्लांट डिपो, इस्लामपुर, लोको कॉलोनी, अलीनगर आदि सहित अन्य स्थानों से मुहर्रम जुलूस निकाला गया। जुलूस इमाम चौक से शुरू होकर बाजार से होते हुए मुगलचक अलीनगर स्थित कर्बला के मैदान में पहुंचा। यहां ताजिये ठंडे किए गए। जुलूस में एक तरफ जहां ताजिया देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था, वहीं कलाकारों की ओर से लाठी, डंडे, ट्यूबलाइट आदि के प्रस्तुत किए जा रहे करतबों को भी लोगों ने देखा। इस दौरान पूरे नगर क्षेत्र में सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। चकिया तिराहे पर सीओ पीडीडीयू नगर अरुण कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात रहा।
दुलहीपुर क्षेत्र के सतपोखरी, महाबलपुर, शकूराबाद, लेडुआपर, हरिशंकरपुर, भिसौड़ी, करवत, बगही, मुहम्मदपुर, मलोखर, दुलहीपुर आदि से 100 से अधिक ताजियों का जुलूस निकाला गया। इस दौरान संजय सिंह, अरशद अहमद, आनंद गुप्ता, चितरंजन सोनकर, सिद्धांत जासवाल, अफताब, जावेद हासमी, जलालुद्दीन, वकार अहमद, नियाज खान, हमिदुल्ला अंसारी आदि शामिल रहे।
कमालपुर संवाददाता के अनुसार, कमालपुर कस्बे के साथ इनायतपुर, नौरंगाबाद, ढोढ़िया, हेतमपुर, कवई पहाड़पुर और बधरी में ताजिया जुलूस गमगीन माहौल में निकाला गया। नौगढ़ संवाददाता के अनुसार, नौगढ़ सहित भैंसौड़ा, बरवाडीह, गोलाबाद और तिवारीपुर आदि गांवों में ताजिया का जुलूस निकाला गया। सुरक्षा के लिए एसडीएम विनय मिश्रा, सीओ नामेंद्र कुमार रावत, थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार यादव, चकरघट्टा थानाध्यक्ष संतोष कुमार, तहसीलदार राहुल सिंह आदि लगे रहे।
चहनिया संवाददाता के अनुसार, क्षेत्र के पखोपुर, रमौली, नौदर, दरियापुर, सढ़ान और नैढ़ी इलाकों से ताजिया निकाली गई। इलिया संवाददाता के अनुसार, शुक्रवार को इलिया कस्बा, पतेरी, चंदा और करवंदिया गांवों से ताजिया का जुलूस पूरे अकीदत और मातमी माहौल में निकाला गया। ताजिया जुलूस गांवों से होते हुए इलिया कस्बे के बस स्टैंड पहुंचा। देर शाम मातमी माहौल में ताजियों को कर्बला में दफन किया गया। इसी प्रकार खरौझा, बरहुआ और बसाढ़ी गांवों में भी ताजिया जुलूस निकाला गया।
इनसेट-
सुरक्षा के बीच निकला ताजिए का जुलूस
चकिया/शिकारगंज। पैगंबर हजरत इमाम हुसैन की याद में शुक्रवार को पुलिस की भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ताजिया का जुलूस निकाला गया। नगर और ग्रामीण अंचलों में कदीमी रास्तों से होता हुआ ताजिया जुलूस देर रात कर्बला पहुंचा। सरकारी ताजिया आगे-आगे चल रहा था। उसके साथ छोटे-बड़े ताजिए चौक से उठकर कदीमी रास्ते से भ्रमण करते हुए महाराजा के किले के पास पहुंचे, जहां से सभी एक साथ होकर कर्बला की तरफ रवाना हो गए।
घर-घर में गूंजती या हुसैन की सदाओं के बीच महिलाओं ने पूरी रात मातम कर कर्बला के शहीदों का गम मनाया। ताजिया के साथ जामा मस्जिद के सदर मुस्ताक अहमद, ताजियादार जैनुल इम्तियाज, मुख्तार अहमद, परवेज, कमरुद्दीन, अफरोज खान, अब्दुल्ला, लल्लन आदि मौजूद रहे। इस अवसर पर सिकंदरपुर, तिलौरी, दिरेहूं, मुजफ्फरपुर, भीषमपुर, शिकारगंज, कल्याणीचक, नेवाजगंज, करवदिया सहित तमाम गांवों में ताजिया जुलूस निकाला गया और देर शाम तक कर्बला में ठंडा किया गया। इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर एसडीएम विकास मित्तल, सीओ अजीत सिंह चौहान, कोतवाल अर्जुन सिंह आदि मौजूद रहे।
अलम, ताबूत और अज़ाखाना-ए-रज़ा के फूलों का जुलूस निकाला
चंदौली। मुहर्रम की 10वीं की सुबह सिकंदरपुर की अंजुमन अब्बासिया तथा स्थानीय अज़ादारों की मौजूदगी में अलम, ताबूत और अज़ाखाना-ए-रज़ा के फूलों का जुलूस निकाला गया। जुलूस चंदौली बाजार और डीएम कार्यालय के सामने से गुजरते हुए बिछियां कर्बला पहुंचा, जहां परंपरानुसार फूलों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
पूरे रास्ते अज़ादार या हुसैन, या अब्बास और अलविदा या हुसैन की सदाओं के साथ मातम करते रहे। इस अवसर पर मशहूर शायर वकार सुल्तानपुरी ने मुहर्रम की अहमियत पर कलाम पेश करते हुए कहा कि इमाम हुसैन किसी एक समुदाय के नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के रहबर हैं। उन्होंने कहा कि कर्बला का पैगाम हमें बताता है कि अन्याय और ज़ुल्म के सामने कभी सिर नहीं झुकाना चाहिए। इस अवसर पर हसन इमाम, मोहम्मद रज़ा, अली, जैगम इमाम, अली इमाम, डॉ. गज़नफ़र इमाम, शाहिद बनारसी आदि मौजूद रहे।
आग का मातम देखने को जुटी लोगों की भीड़
दुलहीपुर। ताजिया जुलूस के पूर्व मुहर्रम की नौवीं पर शुक्रवार को दुलहीपुर में पारंपरिक आग का मातम अकीदत, अनुशासन और गमगीन माहौल में हुआ। इमाम हुसैन की शहादत की याद में शिया समुदाय के अकीदतमंदों ने दहकते अंगारों पर नंगे पैर चलकर मातम अदा किया। इस अनोखी धार्मिक रस्म को देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों सहित दूर-दराज से भी हजारों लोग पहुंचे।
मातम से पहले लकड़ियों को जलाकर अंगारों की विशेष तैयारी की गई। अंगारे पूरी तरह तैयार होने के बाद या हुसैन, या हुसैन की सदाओं के बीच अकीदतमंद एक-एक कर अंगारों पर चले। आयोजन में महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की भी बड़ी भागीदारी रही। कई छोटे बच्चों ने हाथ में पवित्र कुरान लेकर अंगारों को पार किया।
खादिम-ए-जुलूस व चंदौली जिले के शिया समुदाय के प्रवक्ता राहिब जाफरी ने बताया कि सन 1840 में मोहर्रम की ताज़ियादारी मिल्लकियान सादात बस्ती दुलहीपुर में की गई थी। ताजियादारी हकीम सादिक अली जाफरी के नेतृत्व में प्रारंभ की गई। सन 1988 से आग के अंगारों का मातम शुरू किया गया। इसे प्रारंभ करने वाले स्वर्गीय नायब रज़ा थे और आज तक यह परंपरा चली आ रही है।
आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। सुरक्षा के मद्देनजर मुगलसराय निरीक्षक विजय प्रताप, मुकेश तिवारी, एसआई मोहम्मद अरशद, दुलहीपुर चौकी प्रभारी संजय कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।
सुरक्षा के बीच निकला ताजिए का जुलूस
चकिया/शिकारगंज। पैगंबर हजरत इमाम हुसैन की याद में शुक्रवार को पुलिस की भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ताजिया का जुलूस निकाला गया। नगर और ग्रामीण अंचलों में कदीमी रास्तों से होता हुआ ताजिया जुलूस देर रात कर्बला पहुंचा। सरकारी ताजिया आगे-आगे चल रहा था। उसके साथ छोटे-बड़े ताजिए चौक से उठकर कदीमी रास्ते से भ्रमण करते हुए महाराजा के किले के पास पहुंचे, जहां से सभी एक साथ होकर कर्बला की तरफ रवाना हो गए।
घरों में गूंजती या हुसैन की सदाओं के बीच महिलाओं ने पूरी रात मातम कर कर्बला के शहीदों का गम मनाया। ताजिया के साथ जामा मस्जिद के सदर मुस्ताक अहमद, ताजियादार जैनुल इम्तियाज, मुख्तार अहमद, परवेज, कमरुद्दीन, अफरोज खां, अब्दुल्ला, लल्लन आदि मौजूद रहे। इस अवसर पर सिकंदरपुर, तिलौरी, दिरेहु, मुजफ्फरपुर, भीषमपुर, शिकारगंज, कल्याणीचक, नेवाजगंज, करवदिया सहित तमाम गांवों में ताजिया जुलूस निकाला गया और देर शाम तक कर्बला में ठंडा किया गया। इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर एसडीएम विकास मित्तल, सीओ अजीत सिंह चौहान, कोतवाल अर्जुन सिंह आदि मौजूद रहे।
अलम, ताबूत और अज़ाखाना-ए-रज़ा के फूलों का जुलूस निकाला
चंदौली। मुहर्रम की 10वीं की सुबह सिकंदरपुर की अंजुमन अब्बासिया तथा स्थानीय अज़ादारों की मौजूदगी में अलम, ताबूत और अज़ाखाना-ए-रज़ा के फूलों का जुलूस निकाला गया। जुलूस चंदौली बाजार और डीएम कार्यालय के सामने से गुजरते हुए बिछियां कर्बला पहुंचा, जहां परंपरानुसार फूलों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
पूरे रास्ते अज़ादार या हुसैन, या अब्बास और अलविदा या हुसैन की सदाओं के साथ मातम करते रहे। इस अवसर पर मशहूर शायर वकार सुल्तानपुरी ने मुहर्रम की अहमियत पर कलाम पेश करते हुए कहा कि इमाम हुसैन किसी एक समुदाय के नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के रहबर हैं। उन्होंने कहा कि कर्बला का पैगाम हमें बताता है कि अन्याय और ज़ुल्म के सामने कभी सिर नहीं झुकाना चाहिए। इस अवसर पर हसन इमाम, मोहम्मद रज़ा, अली, जैगम इमाम, अली इमाम, डॉ. गज़नफ़र इमाम, शाहिद बनारसी आदि मौजूद रहे।
आग का मातम देखने को जुटी लोगों की भीड़
दुलहीपुर। ताजिया जुलूस के पूर्व मुहर्रम की नौवीं पर शुक्रवार को दुलहीपुर में पारंपरिक आग का मातम अकीदत, अनुशासन और गमगीन माहौल में हुआ। इमाम हुसैन की शहादत की याद में शिया समुदाय के अकीदतमंदों ने दहकते अंगारों पर नंगे पैर चलकर मातम अदा किया। इस अनोखी धार्मिक रस्म को देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों सहित दूर-दराज से भी हजारों लोग पहुंचे।
मातम से पहले लकड़ियों को जलाकर अंगारों की विशेष तैयारी की गई। अंगारे पूरी तरह तैयार होने के बाद या हुसैन, या हुसैन की सदाओं के बीच अकीदतमंद एक-एक कर अंगारों पर चले। आयोजन में महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की भी बड़ी भागीदारी रही। कई छोटे बच्चों ने हाथ में पवित्र कुरान लेकर अंगारों को पार किया।
खादिम-ए-जुलूस व चंदौली जिले के शिया समुदाय के प्रवक्ता राहिब जाफरी ने बताया कि सन 1840 में मोहर्रम की ताज़ियादारी मिल्लकियान सादात बस्ती दुलहीपुर में की गई थी। ताजियादारी हकीम सादिक अली जाफरी के नेतृत्व में प्रारंभ की गई। सन 1988 से आग के अंगारों का मातम शुरू किया गया। इसे प्रारंभ करने वाले स्वर्गीय नायब रज़ा ने शुरू किया था और आज तक यह परंपरा चली आ रही है।
आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। सुरक्षा के मद्देनजर मुगलसराय निरीक्षक विजय प्रताप, मुकेश तिवारी, एसआई मोहम्मद अरशद, दुलहीपुर चौकी प्रभारी संजय कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।
मुहर्रम पर युवाओं ने अखाड़ों में दिखाए हैरतअंगेज करतब
धानापुर। मुहर्रम पर क्षेत्र में अकीदत और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने या हुसैन की सदाएं बुलंद करते हुए अखाड़ों में पारंपरिक करतबों का शानदार प्रदर्शन किया।
बृहस्पतिवार की रात पठानटोली में चिरैया और ब्रइया पार्टी के खिलाड़ियों ने पूरी रात डंडा खेल और विभिन्न पारंपरिक करतब प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। वहीं, शुक्रवार को 10वीं मुहर्रम के दिन शाम करीब चार बजे बाजार स्थित धाना शहीद मस्जिद के समीप दोनों अखाड़ों ने आमने-सामने अपने कौशल का प्रदर्शन किया। करतबों के दौरान दोनों दलों ने अपनी कला और हुनर का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए लोगों की खूब वाहवाही बटोरी। इस अवसर पर अनवर खान, जूनी खान, गुड्डू खान, हाजी बिस्मिल्लाह, गब्बू खान, मास्टर इरफान आदि मौजूद रहे।
नौबतपुर के कर्मनाशा नदी पुल पर दो राज्यों के तीन ताजियों का हुआ मिलन
सैयदराजा। स्थानीय नौबतपुर के कर्मनाशा नदी पुल पर दो राज्यों के तीन ताजियों का मिलन हुआ। नौबतपुर बाजार व बिहार राज्य के खजुरा, सरैंया में दसवीं मोहर्रम पर हजरत इमाम हुसैन की याद में ताज़ियों के साथ जुलूस निकाले गए। जुलूस के दौरान या अली, या हुसैन की सदाएं चहुंओर गूंजती रहीं।
वहीं, शुक्रवार की भोर में यूपी-बिहार बॉर्डर पर कर्मनाशा नदी के पुल पर ताजियों का मिलन हुआ। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में यूपी के नौबतपुर एवं बिहार के खजुरा, सरैंया के हिंदू व मुस्लिम शामिल होकर आपसी मुहब्बत व भाईचारे की मिसाल पेश की। शाम ढलने के बाद तीनों ताजिए कर्मनाशा नदी पुल पर पहुंचकर मिलन करने के बाद अपने-अपने कर्बला को प्रस्थान कर गए। रात आठ बजे ताजियों को ठंडा किया गया।







