राज्य मंत्री संजीव सिंह गौड़ को सौंपा ज्ञापन
मझवार, तुरैहा समेत निषाद, केवट, मल्लाह, बिंद, कश्यप सहित कई जातियों को एससी प्रमाणपत्र जारी करने की मांग, राष्ट्रपति से मुख्यमंत्री तक भेजा ज्ञापन
सोनभद्र। उत्तर प्रदेश में मझवार, तुरैहा तथा उनसे संबंधित निषाद, केवट, मल्लाह, कश्यप, कहार, धीमर, बिंद, बाथम, तुरहा, गोड़िया, मांझी, मछुआ सहित अन्य जातियों को अनुसूचित जाति (एससी) का प्रमाणपत्र जारी किए जाने की मांग को लेकर मंगलवार को निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव सिंह गौड़ को उनके डाला बाड़ी स्थित आवास पर ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों और उपजिलाधिकारियों को संबोधित किया गया है। इसमें मांग की गई है कि संबंधित जातियों को अनुसूचित जाति के प्रमाणपत्र जारी कर संवैधानिक अधिकारों और योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए।
ज्ञापन में कहा गया कि 31 दिसंबर 2016 और 12 जनवरी 2017 की अधिसूचनाओं के अनुसार उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 में संशोधन किया गया था। इसके बावजूद कई जिलों और तहसीलों में संबंधित जातियों के लोगों को अब भी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का प्रमाणपत्र जारी किया जा रहा है, जिसे ज्ञापन में शासनादेश और संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत बताया गया।
ज्ञापन में 10 अगस्त 1950 की राष्ट्रपति अधिसूचना, 1961 की जनगणना मैन्युअल, 29 अगस्त 1977 के भारत सरकार के शासनादेश तथा विभिन्न राजस्व परिषद अभिलेखों का हवाला देते हुए दावा किया गया कि मझवार, तुरैहा और उनकी पर्यायवाची जातियां अनुसूचित जाति समूह में सूचीबद्ध हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि देश के कई राज्यों में इन समुदायों को अनुसूचित जाति अथवा अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है।
निषाद पार्टी के पदाधिकारियों ने मांग की कि वर्ष 2016 एवं 2017 के शासनादेशों का प्रदेशभर में प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाए, संबंधित जातियों को ओबीसी प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया रोकी जाए तथा पात्र लोगों को अनुसूचित जाति के प्रमाणपत्र जारी किए जाएं।
ज्ञापन में उत्तराखंड की तर्ज पर उत्तर प्रदेश विधानसभा में आवश्यक अध्यादेश या विधेयक लाकर मझवार, तुरैहा एवं तरमाली पासी समूह की पर्यायवाची जातियों की स्पष्ट परिभाषा निर्धारित करने की भी मांग की गई। इसके साथ ही इन जातियों को अनुसूचित जाति के आरक्षण में शामिल कर सभी उपजिलाधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने की अपील की गई।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष अनिकेत निषाद, प्रदेश महासचिव दयाशंकर निषाद, जिला संयोजक शिवेंद्र निषाद, छोटेलाल साहनी, राम सुंदर, मुनिया देवी, पिंटू, प्रदीप, फूलचंद चौधरी, विनय, राकेश, लाल साहब, लाल जी, विनोद चौधरी और राज नारायण सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।







