अभिषेक कुमार सिंह
उत्तर प्रदेश में शिक्षा को सुलभ और किफायती बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सत्र 2026-27 से सभी विद्यालयों में केवल अधिकृत पाठ्यपुस्तकों से ही पढ़ाई कराई जाएगी। अनधिकृत किताबों और गाइड के उपयोग पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
परिषद के अनुसार कई विद्यालयों में निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें और गाइड छात्रों पर अनिवार्य कर दी जाती थीं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता था। इसे देखते हुए अब यूपी बोर्ड में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को केवल एनसीईआरटी की पुस्तकों से ही पढ़ाई कराई जाएगी। इसके लिए अधिकृत प्रकाशकों के नाम भी निर्धारित कर दिए गए हैं। यदि किसी विद्यालय में इसके अतिरिक्त किसी अन्य प्रकाशक की किताबें पाई जाती हैं तो संबंधित विद्यालय के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
जिला विद्यालय निरीक्षक प्रकाश सिंह ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से इस संबंध में एक पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कक्षा 9 से 12 तक के सभी छात्रों को एनसीईआरटी की किताबों से ही पढ़ाया जाएगा। इसके लिए प्रकाशकों के नाम भी तय कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि विभाग का मुख्य उद्देश्य इस निर्देश का सख्ती से पालन कराना है।
उन्होंने बताया कि सीबीएसई बोर्ड के विद्यालयों में पहले से ही एनसीईआरटी पैटर्न लागू है, लेकिन अब यूपी बोर्ड के विद्यालयों में भी इसे अनिवार्य रूप से लागू कराया जाएगा।
इस समय नए सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और किताबों की महंगाई को लेकर अभिभावक भी चिंतित हैं। इस पर जिला विद्यालय निरीक्षक ने बताया कि फीस रेगुलेशन एक्ट 2018 के तहत यदि कोई शिकायत मिलती है तो उसकी जांच की जाती है। इस अधिनियम में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कोई भी विद्यालय मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकता।
इसके अलावा किसी भी अभिभावक को यह बाध्य नहीं किया जा सकता कि वह विद्यालय से संबंधित सामग्री किसी विशेष दुकान से ही खरीदे। साथ ही छात्रों की ड्रेस में भी पांच वर्ष से पहले बदलाव नहीं किया जा सकता। यदि किसी विद्यालय के खिलाफ ऐसी शिकायत मिलती है तो उस पर नियमानुसार जांच कर कार्रवाई की जाती है।




