राममाड़ो गांव में पांच दावेदारों के बीच हुआ चयन, ग्रामीण ने एसडीएम से की जांच की मांग
चंदौली। शहाबगंज विकासखंड के राममाड़ो गांव में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान के चयन को लेकर विवाद गहरा गया है। करीब एक वर्ष से रिक्त चल रही राशन की दुकान के लिए चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ग्रामीणों के एक पक्ष ने अनियमितता और पक्षपात के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, राममाड़ो गांव में सरकारी राशन की दुकान के लिए पांच लोगों ने दावेदारी की थी। बुधवार को ग्रामसभा की खुली बैठक में चयन प्रक्रिया आयोजित की गई। प्रशासन की ओर से मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश कुशवाहा को नोडल अधिकारी नामित किया गया था। नोडल अधिकारी और एडीओ पंचायत की मौजूदगी में समर्थन के आधार पर सत्येंद्र चंद्र निगम को कोटेदार घोषित किया गया।
चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल
चयन से असंतुष्ट ग्रामीणों का आरोप है कि प्रक्रिया के दौरान निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि अन्य दावेदारों के हस्ताक्षर नहीं कराए गए और खुली बैठक की सूचना भी सभी ग्रामीणों तक नहीं पहुंचाई गई। इससे बैठक में ग्रामीणों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित नहीं हो सकी। ग्रामीणों ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
एसडीएम को सौंपा प्रार्थना पत्र
ग्रामीण शिवेश कुमार तिवारी ने इस संबंध में उपजिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपकर चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने और अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी राशन की दुकान का चयन पारदर्शी तरीके से होना चाहिए, ताकि पात्र दावेदारों के साथ किसी तरह का अन्याय न हो।
मामले को लेकर मायाशंकर तिवारी, बुच्चुन तिवारी, पंकज, दीनदयाल मिश्रा, प्रदीप मिश्रा, मोनू मिश्रा, साजन तिवारी, अंकित तिवारी, सुशील तिवारी और डबलू यादव समेत अन्य ग्रामीणों ने भी नाराजगी जताई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से शिकायत की जांच कराकर चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग की है।
फिलहाल, ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।





















