करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े सवालों के जवाब खोज रही एसआईटी, दान प्रबंधन व्यवस्था भी जांच के घेरे में
अयोध्या।
राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और दशकों के संघर्ष का प्रतीक है। ऐसे में मंदिर में चढ़ावे और बहुमूल्य उपहारों के प्रबंधन को लेकर उठे सवालों ने स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है, लेकिन पिछले कुछ सप्ताह में सामने आए आरोपों और दावों ने मंदिर की दान प्रबंधन व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) अब केवल कथित नकदी अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि बहुमूल्य आभूषणों, चांदी की शिलाओं, रिकॉर्ड प्रबंधन, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही की पूरी श्रृंखला की पड़ताल कर रही है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
मामले ने तब तूल पकड़ा जब मंदिर में चढ़ावे के रूप में प्राप्त नकदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठाए गए। कुछ सामाजिक और राजनीतिक व्यक्तियों ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए कि चढ़ावे के लेखे-जोखे में विसंगतियां हो सकती हैं।
इन आरोपों के बाद मामला राजनीतिक विमर्श का हिस्सा भी बना। विपक्षी दलों ने पारदर्शिता की मांग उठाई, जबकि मंदिर ट्रस्ट ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सभी वित्तीय प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों के तहत संचालित होती हैं और नियमित ऑडिट भी कराया जाता है।
विवाद बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी।
अब जांच का केंद्र बनीं 60 किलो चांदी की शिलाएं
जांच के दौरान एक नया पहलू सामने आया है। जानकारी के अनुसार राम मंदिर निर्माण से जुड़े अवसर पर भेंट की गई लगभग 60 किलो चांदी की शिलाओं का रिकॉर्ड जांच एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रश्न बन गया है।
दानदाताओं का दावा है कि शिलाएं विधिवत मंदिर प्रशासन को सौंपी गई थीं और उनके पास इससे संबंधित दस्तावेज भी मौजूद हैं। दूसरी ओर जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन शिलाओं का अंतिम उपयोग किस रूप में हुआ और उनका वर्तमान रिकॉर्ड कहां उपलब्ध है।
फिलहाल इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
बहुमूल्य हार और चरण पादुका भी जांच के घेरे में
जांच में एक अन्य पहलू उस बहुमूल्य हार और चरण पादुका से जुड़ा है, जिन्हें प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान रामलला को भेंट किए जाने का दावा किया गया था।
जांच अधिकारियों के सामने मुख्य सवाल यह है कि इन उपहारों के प्राप्त होने, सुरक्षित रखे जाने, स्थानांतरण अथवा उपयोग से संबंधित दस्तावेजी रिकॉर्ड कहां है। कुछ लोगों के बयान सामने आए हैं, लेकिन अब तक उपलब्ध सूचनाओं में कई स्तरों पर विरोधाभास भी दिखाई दे रहे हैं।
यही कारण है कि एसआईटी अब घटनाक्रम की पूरी श्रृंखला को जोड़ने का प्रयास कर रही है।
केवल चोरी नहीं, व्यवस्था भी जांच के दायरे में
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार एसआईटी का फोकस अब केवल कथित चोरी या गबन तक सीमित नहीं है। जांचकर्ता यह भी समझना चाहते हैं कि चढ़ावे के संग्रहण, गणना, भंडारण और बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया कितनी व्यवस्थित थी।
बताया जा रहा है कि नकदी की गिनती, निगरानी और रिकॉर्डिंग से जुड़े कई स्तरों की समीक्षा की जा रही है। कुछ कर्मचारियों और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ भी की गई है।
जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि कहीं समस्या व्यक्तिगत स्तर की थी या फिर निगरानी तंत्र में कोई संस्थागत कमजोरी मौजूद थी।
ट्रस्ट का क्या कहना है?
मंदिर ट्रस्ट लगातार यह कहता रहा है कि वित्तीय लेन-देन और दान से जुड़ी प्रक्रियाएं निर्धारित मानकों के अनुसार संचालित होती हैं। ट्रस्ट का कहना है कि नियमित ऑडिट व्यवस्था लागू है और अब तक किसी वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है।
ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच एजेंसियों को हर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल हो सके।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
मामले के सामने आने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने-अपने स्तर पर प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष ने जहां अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है, वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने और जांच पूरी होने का इंतजार करने की अपील की है।
सबसे बड़ा सवाल: आस्था का विश्वास कैसे मजबूत रहे?
राम मंदिर करोड़ों लोगों की श्रद्धा का केंद्र है। ऐसे में विवाद का सबसे संवेदनशील पक्ष आर्थिक नहीं, बल्कि विश्वास का है। श्रद्धालु यह जानना चाहते हैं कि उनके द्वारा अर्पित दान और उपहार पूरी पारदर्शिता के साथ सुरक्षित रखे जा रहे हैं या नहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकरण का सबसे बड़ा सबक यह है कि बड़े धार्मिक संस्थानों में आधुनिक डिजिटल रिकॉर्डिंग, सीसीटीवी निगरानी, बारकोड आधारित इन्वेंट्री प्रबंधन और स्वतंत्र ऑडिट जैसी व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जाना चाहिए।
फिलहाल सभी निगाहें एसआईटी की जांच पर टिकी हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का था, रिकॉर्ड प्रबंधन की कमजोरी का, या फिर आरोपों के पीछे कोई गंभीर अनियमितता वास्तव में मौजूद थी।
Ankit Awasthi








