राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बाद यह ट्रस्ट की पहली बैठक राम मंदिर गेस्ट हाउस में हुई सम्पन्न
लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी को ले करके श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं मणिराम दास छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास की अध्यक्षता में आज श्रीराम मंदिर के गेस्ट हाउस में ट्रस्ट की पहली बैठक सम्पन्न हुई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस बैठक में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय बंसल, ट्रस्ट के सदस्य डा. अनिल मिश्रा ने भाग नहीं लिया। उनके इस्तीफे पर ट्रस्ट ने बड़ी गंभीरता से चर्चा की। उसके बाद उनका इस्तीफा सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया गया और उन्हे बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। चढ़ावा चोरी मामले में नाम उछलने के बाद चम्पत राय, डा. अनिल मिश्रा को लेकर लगातार तीखे सवाल उठाये जा रहे थे, जिसके बाद उन्होंने खुद इस्तीफा दे दिया था।
बैठक की शुरुआत में ही ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने यह बेहद संवेदनशील घटना बताया। उन्होंने कहा कि रामलला के दरबार में हुई इस कथित चोरी की घटना पर गहरा दुख और खेद व्यक्त किया। इसके तुरन्त बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्द देव गिरी ने मीटिंग का मुख्य एजेंडा सबके सामने रखा और चम्पत राय व डा. अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर विचार का प्रस्ताव पटल पर रखा। इस दौरान बैठक में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष का दर्द इस हाई प्रोफाइल के दौरान देखा गया। कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने बेहद भावुक होते हुए स्वीकार किया कि हमसे बहुत बड़ी गलती हो गयी है। इस पूरे घटनाक्रम से दुनिया भर के भक्तों को गहरी ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में कुछ जगहों पर तकनीकी और प्रशासनिक खामियां थीं जिन पर उस समय पर ध्यान नहीं दिया गया। सूत्रों का कहना है कि जब अंदर यह मंथन चल रहा था तब चम्पत राय और डा. अनिल मिश्रा एक साथ अयोध्या में ही मौजूद थे, लेकिन दोनों में से कोई भी इस बैठक में शामिल नहीं हुआ। गौरतलब है कि ट्रस्ट के एक सदस्य ने एफआईआर दर्ज कराने के पीछे असली वजह का खुलासा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंतरिक और शुरुआती जांच में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमिततायें और विसंगतियां सामने आयी थीं। प्रथम दृष्टया मिले इन पुख्ता तथ्यों के आधार पर ही कानूनी कार्यवाही करने और पुलिस को शामिल करने का निर्णय लिया गया। ट्रस्ट में उन्होंने बताया कि इस मामले की पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी जांच शुरू करने के लिये ही तत्काल ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य कृष्ण मोहन को एफ.आई.आर. दर्ज कराया। इस वक्त जनता और श्रद्धालुओं को खोया हुआ भरोसा वापस जीतना हमारे लिये सबसे जरूरी है। ट्रस्ट से यह भी जानकारी मिली कि ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव करके यह भरोसा जीता जा सकता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विवादों से घिरे विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव को बैठक से बाहर निकलना पड़ा और वह बैठक में शामिल नहीं हुए। लेकिन ट्रस्ट के नियमित सदस्यों ने उन्हें अंदर बैठने से साफ मना भी कर दिया।
सदस्यों ने कड़ा रुख अपनाते हुए ट्रस्ट के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि चूंकि गोपाल राव एक पूर्णकालिक ट्रस्टी नहीं हैं इसलिए इस अत्यन्त गोपनीय निर्णय लेने वाली बैठक का हिस्सा नहीं हो सकते। इसके बाद उन्हें बैठक से बाहर कर दिया गया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक और ट्रस्टी स्वामी परमानन्द गिरी ने संतों के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि धर्म और मर्यादा की रक्षा करना हम सभी का पहला और सर्वोच्च कर्तव्य है। जब करोड़ों लोग अपनी अटूट आस्था के साथ पवित्र धार्मिक स्थल से जु?ते हैं तो प्रबंधन को छोटी से छोटी बातों का भी विशेष ध्यान रखना चाहिये। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा ही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। बैठक में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्द देव गिरी मीटिंग का एजेंडा रखा। जिसमें ट्रस्ट के महामंत्री चम्पत राय, वरिष्ठ सदस्य डा. अनिल मिश्रा के इस्तीफे का प्रस्ताव रखा गया और चर्चायें शुरू हुईं। जानकारी के मुताबिक ट्रस्ट के कुछ सदस्यों ने साफ शर्त रखी थी कि अगर चम्पत राय और डा. अनिल मिश्रा बैठक में रहेंगे तो वह बैठक में शामिल नहीं होंगे। इस दबाव के बाद दोनों बड़े नाम मीटिंग से दूर रहे। इस बीच जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था का पुख्ता इंतजाम किया था। पूरे अयोध्या में बैरियर लगा करके किसी गाडिय़ों का प्रवेश नहीं दिया जा रहा था, परन्तु रामलला का दर्शन श्रद्धालु बराबर कर रहे थे। गौरतलब है कि ट्रस्ट की बैठक 11 जुलाई को होनी थी, परन्तु उस बैठक को 6 जुलाई को ही बुला लिया गया। इस बैठक में ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी, ट्रस्टी गणों में शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती, महंत दिनेन्द्र दास, कृष्ण मोहन, अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी सहित करीब ग्यारह लोग शामिल थे, जिसमें दो ट्रस्टीगण वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये जुड़े।
कृष्ण मोहन राय को मिली मंदिर व्यवस्था की जिम्मेदारी
कहा- मंदिर पर आया अविश्वास दूर करना चुनौती
स्वतंत्र भारत ब्यूरो, लखनऊ। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है, जिसके तहत चंपत राय की विदाई के बाद अब कृष्ण मोहन को ट्रस्ट की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिम्मेदारी संभालते ही कृष्ण मोहन ने अपनी पहली औपचारिक पत्रकार वार्ता को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने मुख्य रूप से ट्रस्ट की साख और जनता के भरोसे को बहाल करने पर जोर दिया। उन्होंने खुले तौर पर स्वीकार किया कि हाल के दिनों में समाज के मन में कुछ बातों को लेकर संशय और अविश्वास का माहौल बना है, जिसे दूर करना ही उनकी सबसे पहली और मुख्य प्राथमिकता होगी। उल्लेखनीय है कि पारदर्शी व्यवस्था बनाने के लिए समिति की अगली बैठक 22 जुलाई को होगी। भविष्य में मंदिर की व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और त्रुटिरहित बनाने के लिए बैठक में एक छोटी समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है। ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को निर्धारित की गई है।








