शाहजहांपुर। जिला कारागार में महिला बंदियों के साथ रह रहे छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों की देखभाल, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सोमवार, 12 अक्टूबर को निरीक्षण किया गया। माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के आदेश के अनुपालन में गठित समिति ने जेल पहुंचकर बच्चों को मिल रही सुविधाओं की जानकारी ली। इस दौरान उनके रहन-सहन, खानपान, स्वास्थ्य और मनोरंजन से जुड़ी व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया।
निरीक्षण समिति में राम औतार त्रिपाठी, कुंवर मुनीश सिंह परिहार (एडवोकेट), न्यायपीठ बाल कल्याण समिति शाहजहांपुर के सदस्य/मजिस्ट्रेट, जिला संरक्षण इकाई की काउंसलर प्रतिभा मिश्रा और सामाजिक कार्यकर्ता सुप्रिया अवस्थी शामिल रहीं। समिति ने जेल में बच्चों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी लेते हुए उनकी जरूरतों के अनुरूप बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने से जुड़े पहलुओं पर ध्यान दिया।
निरीक्षण के दौरान शून्य से तीन वर्ष तक के बच्चों की दैनिक गतिविधियों, खानपान और देखभाल की व्यवस्था के बारे में जानकारी जुटाई गई। वहीं, तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। न्यायपीठ बाल कल्याण समिति की ओर से संबंधित बच्चों का प्री-प्राइमरी और प्राथमिक विद्यालयों में नामांकन कराने के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए गए, ताकि उन्हें उम्र के अनुसार पढ़ाई का अवसर मिल सके।
समिति का उद्देश्य महिला बंदियों के साथ रह रहे बच्चों के हितों की रक्षा करने के साथ उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और समुचित पालन-पोषण की व्यवस्था को बेहतर बनाना रहा। जेल में रहने वाले इन बच्चों को भी बेहतर माहौल और सीखने के अवसर मिलें, इसके लिए जरूरी सुविधाओं पर ध्यान देना अहम है। निरीक्षण के जरिए बच्चों की जरूरतों को समझने और उन्हें शिक्षा से जोड़ने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया गया।





















