लखनऊ में शारदीय नवरात्र की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार नवरात्र का पर्व 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर तक चलेगा। रविवार, 11 अक्टूबर को कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाएगी। उत्थान ज्योतिष एवं आध्यात्म संस्थान के निदेशक पंडित दिवाकर त्रिपाठी के अनुसार, कलश स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:36 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक रहेगा। नवरात्र के दौरान भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करेंगे और घरों व मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
नवरात्र के दूसरे दिन 12 अक्टूबर को मां ब्रह्मचारिणी और 13 अक्टूबर को मां चंद्रघंटा की पूजा होगी। 14 अक्टूबर को मां कूष्मांडा और 15 अक्टूबर को मां स्कंदमाता की आराधना की जाएगी। इसके बाद 16 अक्टूबर को मां कात्यायनी और 17 अक्टूबर को मां कालरात्रि की पूजा होगी। पंडित दिवाकर त्रिपाठी के अनुसार, 17 अक्टूबर को सुबह 8:58 बजे से पहले देवी प्रतिमा की स्थापना करना उचित रहेगा।
18 अक्टूबर को महाष्टमी व्रत और निशा पूजा का विशेष महत्व रहेगा। इसके अगले दिन 19 अक्टूबर को महानवमी मनाई जाएगी और इसी दिन नवमी व्रत रखा जाएगा। कन्या पूजन के लिए 19 अक्टूबर को सुबह 7:53 बजे के बाद का समय बताया गया है। इसके अलावा 20 अक्टूबर को सुबह 9:35 बजे से पहले तक भी कन्या पूजन किया जा सकेगा। भक्त अपनी परंपरा और पूजा-विधि के अनुसार कन्याओं को भोजन कराकर मां दुर्गा से सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।
नवरात्र के समापन पर मंगलवार, 20 अक्टूबर को विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीराम की विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाया जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस बार मां दुर्गा का आगमन घोड़े पर होगा। नवरात्र के दौरान श्रद्धालु व्रत, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से मां दुर्गा की आराधना करेंगे। कलश स्थापना और कन्या पूजन से जुड़े समय का पालन करने के लिए श्रद्धालु स्थानीय पंचांग और अपने पुरोहित से भी जानकारी ले सकते हैं।





















