श्रावस्ती। किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने और खाद की कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने जिले में सघन जांच अभियान चलाया। जिलाधिकारी अन्नपूर्णा गर्ग के निर्देश पर तीनों तहसीलों में गठित संयुक्त टीमों ने उर्वरक बिक्री केंद्रों पर औचक छापेमारी की। अभियान के दौरान कुल 22 उर्वरक प्रतिष्ठानों की जांच की गई और संदेह के आधार पर नौ उर्वरक नमूने लिए गए। जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार गुप्ता ने बताया कि शासन के निर्देश के क्रम में डीएम ने तहसीलवार तीन जांच टीमों का गठन किया था। टीमों को उर्वरक की उपलब्धता, गुणवत्ता, स्टॉक और बिक्री व्यवस्था की जांच करने के निर्देश दिए गए थे।
जमुनहा में 12 दुकानों की जांच, दो लाइसेंस निलंबित
तहसील जमुनहा क्षेत्र में जिला कृषि अधिकारी और उपजिलाधिकारी की संयुक्त टीम ने 12 उर्वरक प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की। इस दौरान चार उर्वरक नमूने जांच के लिए लिए गए। जांच के दौरान पांडेय किसान सेवा केंद्र और श्रावस्ती किसान सेवा केंद्र के स्टॉक रजिस्टर और वितरण रजिस्टर में दर्ज विवरण में अंतर पाया गया। अनियमितता मिलने पर दोनों प्रतिष्ठानों के उर्वरक प्राधिकार पत्र निलंबित कर दिए गए। वहीं, पटना मल्हीपुर, जमुनहा स्थित वर्मा किसान सेवा केंद्र का स्टॉक और वितरण रजिस्टर अद्यतन नहीं मिला। इस पर संबंधित विक्रेता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
भिनगा और इकौना में भी हुई छापेमारी
तहसील भिनगा क्षेत्र में उपजिलाधिकारी भिनगा और उप कृषि निदेशक की संयुक्त टीम ने छह उर्वरक प्रतिष्ठानों की जांच की। इस दौरान तीन उर्वरक नमूने लिए गए। इसी तरह तहसील इकौना में उपजिलाधिकारी और जिला कृषि रक्षा अधिकारी की संयुक्त टीम ने चार दुकानों पर जांच की। यहां से दो उर्वरक नमूने लिए गए।
स्टॉक और रेट बोर्ड अपडेट रखने के निर्देश
जिला प्रशासन ने सभी उर्वरक विक्रेताओं को स्टॉक और रेट बोर्ड, स्टॉक रजिस्टर तथा वितरण रजिस्टर नियमित रूप से अपडेट रखने के निर्देश दिए हैं। किसानों को फॉर्मर आईडी के माध्यम से ही उर्वरक उपलब्ध कराने को कहा गया है। अधिकारियों ने शासन के निर्देशों के अनुसार प्रति हेक्टेयर अधिकतम सात बोरी यूरिया और पांच बोरी डीएपी के वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही सभी जरूरी अभिलेखों को अद्यतन रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उर्वरक बिक्री में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
मनीष कुमार






