श्रावस्ती, 16 अक्टूबर 2026। गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचन-2026 को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। चुनाव के दौरान प्रत्याशियों और उनके निर्वाचन अभिकर्ताओं की ओर से पोस्टर, पम्फलेट और अन्य प्रचार सामग्री छपवाई जा सकती है। इसे देखते हुए अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) ललित कुमार ने जिले के प्रिंटिंग प्रेस संचालकों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने साफ किया है कि चुनावी प्रचार सामग्री की छपाई में नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
प्रिंटर और प्रकाशक का नाम-पता लिखना अनिवार्य
अपर जिलाधिकारी ने बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 127 के तहत किसी भी चुनावी पोस्टर या पम्फलेट पर उसे छापने वाले प्रिंटर और प्रकाशित करने वाले प्रकाशक का नाम व पता स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए। बिना इन विवरणों के चुनावी प्रचार सामग्री की छपाई या प्रकाशन करना नियमों का उल्लंघन है। इसलिए सभी प्रिंटिंग प्रेस संचालकों को निर्देशों का पालन करते हुए ही चुनाव से संबंधित सामग्री छापने को कहा गया है।
घोषणा-पत्र के बिना नहीं छपेगी चुनावी सामग्री
नियमों के अनुसार, चुनावी पम्फलेट या पोस्टर छपवाने से पहले प्रकाशक को अपनी पहचान से संबंधित घोषणा-पत्र दो प्रतियों में प्रिंटर को देना होगा। इस घोषणा-पत्र पर प्रकाशक के हस्ताक्षर होने चाहिए और इसे ऐसे दो व्यक्तियों से प्रमाणित कराया जाना चाहिए, जो प्रकाशक को व्यक्तिगत रूप से जानते हों। इसके साथ ही, छपाई के बाद निर्धारित समय के भीतर प्रिंटर को घोषणा-पत्र की एक प्रति और छपी हुई सामग्री की एक प्रति संबंधित जिला मजिस्ट्रेट को भेजनी होगी। इन प्रक्रियाओं का उद्देश्य चुनावी प्रचार सामग्री के प्रकाशक की पहचान सुनिश्चित करना और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना है।
नियम तोड़ने पर छह महीने तक की जेल या जुर्माना
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रचार के लिए बांटे जाने वाले छपे हुए पम्फलेट, हैंडबिल, पोस्टर और प्लेकार्ड इस कानून के दायरे में आते हैं। हालांकि, केवल चुनावी सभा की तारीख, समय और स्थान की जानकारी देने वाली सामग्री तथा चुनाव एजेंटों या कार्यकर्ताओं के लिए सामान्य निर्देशों वाली सामग्री को निर्धारित अपवादों के तहत रखा गया है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 127 के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर दोषी व्यक्ति को छह महीने तक की कैद, दो हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं। ऐसे में प्रिंटिंग प्रेस संचालकों के लिए जरूरी है कि वे चुनावी सामग्री छापने से पहले सभी आवश्यक दस्तावेजों और कानूनी औपचारिकताओं की जांच कर लें।





















