Solar Eclipse 2026: 12 अगस्त 2026, बुधवार को हरियाली अमावस्या के दिन साल का एक महत्वपूर्ण सूर्यग्रहण लगने जा रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में लगेगा। हालांकि यह सूर्यग्रहण भारत में कहीं से भी दिखाई नहीं देगा, लेकिन ज्योतिष के नजरिए से ग्रहों की स्थिति का प्रभाव मौसम और सामाजिक परिस्थितियों पर पड़ने की बात कही जा रही है। ज्योतिषविदों के अनुसार, ग्रहण के समय सूर्य के साथ गुरु और बुध की स्थिति तथा भारत की स्वतंत्रता की कुंडली में ग्रहों की स्थिति को देखते हुए आने वाले दिनों में मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।
कहां-कहां दिखाई देगा ग्रहण?
यह पूर्ण सूर्यग्रहण मुख्य रूप से यूरोप के कई हिस्सों में दिखाई देने की बात कही गई है। ग्रीनलैंड और अटलांटिक महासागर के कुछ क्षेत्रों के अलावा स्पेन, पुर्तगाल, इंग्लैंड, फ्रांस और इटली जैसे देशों में भी इसका प्रभाव देखा जा सकेगा। कुछ स्थानों पर ग्रहण सूर्यास्त से पहले शाम के समय नजर आने की संभावना बताई गई है। ज्योतिषीय आकलन के मुताबिक, जुलाई में भीषण गर्मी झेल चुके यूरोप के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में ग्रहण के बाद मौसम का मिजाज अचानक बदल सकता है। कुछ देशों में सामान्य से अधिक बारिश और भूकंपीय गतिविधियों की आशंका जताई गई है।
यूरोप में असामान्य बारिश के संकेत
ज्योतिषीय गणना में बताया गया है कि कर्क जल तत्व की राशि है और ग्रहण के दौरान सूर्य के साथ गुरु तथा बुध की स्थिति बन रही है। इसी आधार पर दावा किया गया है कि 12 अगस्त के बाद करीब 30 दिनों तक फ्रांस, स्पेन, पुर्तगाल, इंग्लैंड और जर्मनी समेत कुछ यूरोपीय देशों में सामान्य से अलग बारिश हो सकती है। फ्रांस के लिए ग्रहण के समय मकर लग्न का उदय बताया गया है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से वर्षा के लिए अनुकूल माना गया है। वहीं स्पेन और पुर्तगाल में धनु लग्न की स्थिति तथा शनि और मंगल के प्रभाव को देखते हुए राजनीतिक अस्थिरता और भूकंपीय गतिविधियों से नुकसान की आशंका जताई गई है।
भारत में इन राज्यों में भारी बारिश का अनुमान
भारत की अमावस्या कुंडली के आधार पर ज्योतिषीय आकलन में देश के मध्य और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में अच्छी बारिश के संकेत बताए गए हैं। विशेष रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में भारी बारिश के बाद कुछ इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनने की आशंका जताई गई है। कूर्म चक्र में दक्षिण-पूर्व दिशा से जुड़े अश्लेषा नक्षत्र में ग्रहण पड़ने के कारण ओडिशा के कुछ हिस्सों में अगले एक महीने के दौरान बाढ़ के योग बताए गए हैं। वहीं दिल्ली-एनसीआर के लिए अगस्त के दूसरे पखवाड़े में बारिश होने से उमस और गर्मी से कुछ राहत मिलने का अनुमान लगाया गया है। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी अच्छी वर्षा के संकेत ज्योतिषीय गणना में बताए गए हैं।
सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में भी बदलाव के संकेत
ज्योतिषीय आकलन के अनुसार, ग्रहों की स्थिति का असर सामाजिक और राजनीतिक घटनाक्रम पर भी पड़ सकता है। कन्या राशि में शुक्र की स्थिति पर शनि और मंगल के प्रभाव के चलते देश के कुछ हिस्सों में विवाद, महिला अपराध और छात्र आंदोलनों जैसे मुद्दे सामने आने की संभावना जताई गई है। अमावस्या की कुंडली में शुक्र के प्रभावित होने को देखते हुए केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और टकराव बढ़ने का अनुमान भी लगाया गया है।
पशुपालकों से जुड़े मामलों पर भी असर
श्रावण मास में कर्क राशि में पड़ने वाले इस सूर्यग्रहण को ज्योतिषीय परंपरा में पशुपालन के लिए अनुकूल नहीं माना गया है। इसी आधार पर यह भी अनुमान जताया गया है कि आने वाले समय में पशुपालक दूध के दाम बढ़ाने को लेकर सरकार पर दबाव बना सकते हैं। ज्योतिषीय आकलन: यह सूर्यग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। मौसम, भूकंप, बाढ़ या राजनीतिक घटनाओं से जुड़े ऊपर बताए गए अनुमान ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित हैं, इन्हें वैज्ञानिक मौसम पूर्वानुमान या आपदा चेतावनी नहीं माना जाना चाहिए।
डॉ. प्रीती पवन तिवारी
ज्योतिर्विद एवं संस्थापक-अध्यक्ष, ज्योतिष सेवा संस्थान






