एटा/जलेसर। जलेसर और एटा सदर तहसील के सीमावर्ती क्षेत्रों से होकर गुजरने वाली अरिंद नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नदी में आए उफान से करीब 10 हजार बीघा में खड़ी धान और मक्का की फसल जलमग्न हो गई है। इससे दो दर्जन से अधिक गांवों के किसानों को भारी नुकसान की आशंका है।
जानकारी के अनुसार, जलेसर तहसील के नोहखास राजस्व क्षेत्र में लगभग 3 हजार बीघा तथा एटा सदर तहसील के निधौलीकलां राजस्व क्षेत्र में करीब 7 हजार बीघा भूमि पर खड़ी फसलें पानी में डूब गई हैं। किसानों का कहना है कि यदि जल्द पानी नहीं निकला तो लाखों रुपये की फसल बर्बाद हो जाएगी।
इन गांवों की फसलें सबसे अधिक प्रभावित
नोहखास क्षेत्र के पवहा, दूल्हा, दयारामपुर, मितरौल, सलेमपुर, नगला उम्मेद, गादुरी और जमालपुर सहित कई गांवों की फसलें जलमग्न हैं। वहीं निधौलीकलां क्षेत्र के चित्तरपुर, दस्तमपुर, गोकुलपुर, फतेहपुर, प्रतापपुर, मगरौली, संतीपुर, लहरा और रूपसपुर समेत कई गांव भी बाढ़ जैसी स्थिति की चपेट में आ गए हैं।
कई स्थानों पर किसान जलभराव के बीच चारपाई डालकर मक्के की फसल काटने को मजबूर हैं, ताकि कुछ उपज बचाई जा सके।
किसानों ने नदी की सफाई पर उठाए सवाल
स्थानीय किसानों उमेश पाल सिंह, शेखर प्रताप सिंह, योगेश पाल सिंह और मुकेश कुमार सिंह समेत अन्य ग्रामीणों का आरोप है कि अरिंद नदी की वर्षों से समुचित सफाई नहीं हुई है। उनका कहना है कि पूर्व में मनरेगा के तहत सफाई कार्य कराया गया था, लेकिन अधिकांश काम केवल कागजों तक सीमित रहा। नदी की पटरी मजबूत नहीं की गई और न ही तल में जमी गाद को प्रभावी ढंग से हटाया गया।
किसानों का कहना है कि नदी में झाड़-झंखाड़ और गाद जमा होने से जल निकासी बाधित रहती है, जिसके कारण हर वर्ष फसलें बाढ़ की चपेट में आ जाती हैं।
राजस्व विभाग ने शुरू किया नुकसान का आकलन
राजस्व विभाग के लेखपाल रजत कुमार शर्मा ने बताया कि गुरुवार को नदी में अधिक पानी आने से स्थिति गंभीर हो गई थी, लेकिन शुक्रवार को जलस्तर में कमी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में फसलों के नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है।
प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, नोहखास राजस्व क्षेत्र में ही एक हजार से अधिक रकबे में फसलें प्रभावित हुई हैं। प्रशासन की टीम लगातार क्षेत्र का निरीक्षण कर क्षति का आकलन कर रही है।







