नई दिल्ली। 7 अक्तूबर 2023 को हमास के इस्राइल पर किए गए अचानक हमले को तीन साल पूरे हो गए हैं। इस हमले के बाद शुरू हुआ इस्राइल-हमास संघर्ष अब तक कई चरणों से गुजर चुका है। तीन वर्षों के दौरान गाजा में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ, लाखों लोग विस्थापित हुए और बुनियादी ढांचे को भारी क्षति पहुंची। दूसरी ओर, इस्राइल को भी लंबे सैन्य अभियान और भारी आर्थिक लागत का सामना करना पड़ा।
7 अक्तूबर 2023 की सुबह यहूदी त्योहार सिम्हत तोराह के दिन हमास और अन्य सशस्त्र समूहों ने इस्राइल पर अचानक बड़ा हमला किया था। गाजा से बड़ी संख्या में रॉकेट दागे गए और हमास के लड़ाके जमीन, समुद्र तथा पैराग्लाइडर के जरिए दक्षिणी इस्राइल में दाखिल हुए। सीमा के आसपास के कस्बों, किबुत्ज और सैन्य ठिकानों के साथ नोवा म्यूजिक फेस्टिवल को भी निशाना बनाया गया।
इस्राइली अधिकारियों के अनुसार, हमले में 1,200 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और 251 लोगों को बंधक बनाकर गाजा ले जाया गया। हमले के कुछ ही घंटों बाद इस्राइल ने युद्ध की घोषणा कर दी और गाजा पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए। इसके बाद इस्राइली सेना ने जमीनी अभियान भी शुरू किया।
13 अक्तूबर 2023 को उत्तरी गाजा के निवासियों को दक्षिण की ओर जाने का आदेश दिया गया। इसके बाद बड़ी संख्या में लोगों ने अपने घर छोड़ दिए। 27 अक्तूबर को इस्राइल ने गाजा में व्यापक जमीनी सैन्य अभियान शुरू किया। इस्राइल ने कहा कि अभियान का उद्देश्य हमास की सैन्य क्षमता को खत्म करना और बंधकों को वापस लाना है।
हमास के बड़े नेताओं को भी बनाया गया निशाना
युद्ध के दौरान हमास के कई प्रमुख नेताओं और कमांडरों की मौत हुई। जनवरी 2024 में वरिष्ठ नेता सालेह अल-अरूरी बेरूत में मारे गए। मार्च 2024 में हमास के डिप्टी मिलिट्री कमांडर मारवान ईसा की मौत की जानकारी सामने आई।
जुलाई 2024 में इस्राइल ने हमास की सैन्य शाखा के प्रमुख मोहम्मद दाइफ को मारने का दावा किया, जिसकी बाद में पुष्टि हुई। इसी महीने हमास के राजनीतिक प्रमुख इस्माइल हानिया की तेहरान में हत्या कर दी गई। उस समय इस्राइल ने आधिकारिक तौर पर इसकी जिम्मेदारी नहीं ली थी।
17 अक्तूबर 2024 को हमास के नेता याह्या सिनवार की मौत की पुष्टि हुई। उन्हें 7 अक्तूबर के हमले की योजना से जुड़े प्रमुख नेताओं में माना जाता था। सिनवार राफा में इस्राइली सैनिकों के साथ मुठभेड़ में मारे गए।
गाजा में भारी तबाही और विस्थापन
तीन साल के संघर्ष में गाजा का बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बड़ी संख्या में मकान, अस्पताल, स्कूल, सड़कें और अन्य सार्वजनिक ढांचे क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए। लाखों फिलिस्तीनी अपने घरों से विस्थापित हुए और मानवीय सहायता की जरूरत लगातार बनी रही।
इस युद्ध का असर केवल गाजा और इस्राइल तक सीमित नहीं रहा। लेबनान में हिजबुल्ला के साथ संघर्ष, ईरान और इस्राइल के बीच सीधे हमले तथा यमन के हूती विद्रोहियों की गतिविधियों ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा दिया।
तीन साल बाद भी गाजा का भविष्य, बंधकों का मुद्दा, हमास की भूमिका, पुनर्निर्माण और इस्राइल-फिलिस्तीन विवाद का स्थायी राजनीतिक समाधान सबसे बड़ी चुनौतियों में बने हुए हैं। संघर्ष ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और राजनीति को भी गहराई से प्रभावित किया है।





















