असोहा (उन्नाव)। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के लोकार्पण से पहले खामियां उजागर की गईं तो एनएचएआई के अफसरों की नींद खुली। मंगलवार सुबह से ही मिट्टी बहने से हुए गड्ढे और सेफ्टी ग्रिल व फेंसिंग की मरम्मत शुरू कराई। आसपास के गांवों में अनाउंसमेंट कराकर फेंसिंग न तोड़ने और जानवरों को चरने के लिए एक्सप्रेसवे के आसपास न छोड़ने की चेतावनी दी। हालांकि मंगलवार को भी टूटी फेंसिंग की वजह से जानवर एक्सप्रेसवे के आसपास नजर आए।
लखनऊ से उन्नाव के आजाद मार्ग चौराहा तक बना 63 किलोमीटर लंबा कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे (एनई-6) बनकर तैयार है। बारिश से कई जगह स्लोप की मिट्टी कट गई और सड़क पटरी के किनारे की मिट्टी धंस गई है। इसके अलावा कई स्थानों पर सेफ्टी ग्रिल व फेंसिंग टूटने से मवेशी एक्सप्रेसवे तक पहुंच रहे हैं। 13 जुलाई को एक्सप्रेसवे का लोकार्पण होना है। इससे खतरों को लेकर मंगलवार को खामियों पर खबर प्रकाशित होने के बाद सुधार शुरू कराया गया।
असोहा ब्लॉक क्षेत्र में सबसे ज्यादा खामियां हैं। मंगतखेड़ा, पटकापुर सहित आसपास करीब 12 किलोमीटर में छह स्थानों पर सड़क पटरी (कच्चा फुटपाथ) बारिश से कट गया है। खेत जाने और मवेशियों को चराने की सुविधा के लिए ग्रामीणों ने पटकापुर, जगेथा, कांथा सहित कई अन्य स्थानों पर 10 से 20 मीटर की दूरी पर लगाई गई फेंसिंग जाली को कई स्थानों पर खोल या तोड़ दिया है।
मंगलवार को सुरक्षा एजेंसी ने एक्सप्रेसवे से सटे गांवों में किसानों को ऐसा न करने और पकड़े जाने पर कार्रवाई की चेतावनी देते हुए अनाउंसमेंट भी कराया। एनएचएआई के पीडी नकुल प्रकाश वर्मा ने बताया कि एक्सप्रेसवे की सड़क में कहीं कोई कमी नहीं है। सुधार की सतत प्रक्रिया है जो हमेशा चलती रहती है। कुछ स्थानों पर ग्रामीणों ने फेंसिंग तोड़ी है, उसे भी ठीक कराया जा रहा है।








