नई रणनीति से होटल, स्थानीय कारोबार, निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने अपनी पर्यटन नीति को नया आयाम देते हुए अब केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के बजाय प्रत्येक पर्यटक से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को होने वाले लाभ पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। सरकार का मानना है कि यदि प्रदेश आने वाला पर्यटक अधिक दिनों तक रुके, विभिन्न पर्यटन स्थलों की यात्रा करे, स्थानीय उत्पादों की खरीदारी करे और होटल, होमस्टे तथा अन्य सेवाओं का अधिक उपयोग करे, तो पर्यटन का वास्तविक आर्थिक लाभ प्रदेश के लाखों लोगों तक पहुंचेगा।
इसी उद्देश्य से पर्यटन विभाग धार्मिक पर्यटन के साथ हेरिटेज, ग्रामीण, इको, सांस्कृतिक और वेलनेस पर्यटन को एक-दूसरे से जोड़कर नए पर्यटन सर्किट विकसित कर रहा है। अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज, मथुरा, आगरा, चित्रकूट, विंध्य क्षेत्र, बुंदेलखंड और बौद्ध सर्किट जैसे प्रमुख स्थलों को इस प्रकार विकसित किया जा रहा है कि पर्यटक एक ही यात्रा में कई स्थानों का भ्रमण करें। इससे उनके ठहरने की अवधि बढ़ेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को अधिक लाभ मिलेगा।
पर्यटन विभाग का मानना है कि पर्यटन केवल दर्शनीय स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह होटल उद्योग, परिवहन, रेस्तरां, हस्तशिल्प, स्थानीय बाजार, गाइड सेवाओं और सांस्कृतिक आयोजनों से भी जुड़ा हुआ है। इसी कारण विभाग “विजिट माय स्टेट” जैसे प्रचार अभियानों के माध्यम से उत्तर प्रदेश की विविध पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत कर रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, पर्यटन मेलों और निवेश सम्मेलनों के जरिए भी प्रदेश को एक आकर्षक पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा है कि सरकार का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को केवल सर्वाधिक पर्यटकों वाला राज्य बनाना नहीं, बल्कि ऐसा पर्यटन मॉडल विकसित करना है जिससे स्थानीय लोगों की आय बढ़े, युवाओं को रोजगार मिले और निजी निवेश को प्रोत्साहन प्राप्त हो। इसी सोच के अनुरूप पर्यटन स्थलों पर बेहतर सड़क संपर्क, पार्किंग, स्वच्छता, डिजिटल सुविधाएं, होमस्टे, हेरिटेज होटल, नदी क्रूज और अन्य आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रणनीति सफल होती है तो उत्तर प्रदेश पर्यटन क्षेत्र में केवल रिकॉर्ड संख्या के लिए नहीं, बल्कि प्रति पर्यटक अधिक आर्थिक मूल्य सृजित करने वाले राज्यों में भी अग्रणी बन सकता है। इससे प्रदेश के होटल व्यवसाय, छोटे व्यापारियों, हस्तशिल्प उद्योग, परिवहन क्षेत्र और स्थानीय उद्यमियों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।








