चंदौली। मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या हटवाने के लिए गलत जानकारी देना लोगों को भारी पड़ सकता है। निर्वाचक नामावली के पुनरीक्षण और शुद्धीकरण अभियान के बीच जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची से जुड़े आवेदन में जानबूझकर गलत जानकारी देने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। उप जिला निर्वाचन अधिकारी राजेश कुमार ने नागरिकों को चेतावनी देते हुए कहा कि मतदाता सूची में नाम शामिल कराने, हटाने या किसी प्रविष्टि में बदलाव के लिए झूठी घोषणा करना दंडनीय अपराध है।
कार्यालय मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के निर्देशों के क्रम में उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत निर्वाचक नामावली तैयार करने, उसमें संशोधन करने या किसी प्रविष्टि को शामिल करने अथवा हटाने के संबंध में जानबूझकर झूठा लिखित बयान या घोषणा करना अपराध है। ऐसा करने वाले व्यक्ति को दोषी पाए जाने पर एक साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं।
उन्होंने बताया कि मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाने या संबंधित प्रविष्टि में बदलाव के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फार्म-7 में भी सही जानकारी देना जरूरी है। इस फार्म के घोषणा पत्र में गलत तथ्य प्रस्तुत करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
जिला प्रशासन ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान के दौरान सभी नागरिकों से सतर्कता बरतने और आवेदन में सही व तथ्यात्मक जानकारी देने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि किसी का नाम गलत तरीके से जुड़वाने या हटवाने की कोशिश करने से बचें। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।





















