लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में वर्ष 2017 एक निर्णायक मोड़ लेकर आया था। जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की कमान संभाली, तब उनके सामने कानून-व्यवस्था, निवेश, रोजगार, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक सुधार जैसी अनेक चुनौतियां थीं। आज लगभग नौ वर्षों के शासनकाल के बाद उत्तर प्रदेश की तस्वीर में कई बड़े बदलाव दिखाई देते हैं। हालांकि उपलब्धियों के साथ-साथ कुछ ऐसे प्रश्न भी हैं जो अब भी जवाब तलाश रहे हैं।
इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार प्रदेश के विभिन्न जिलों में विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास कर रहे हैं। हाल के दिनों में बुंदेलखंड क्षेत्र सहित कई जिलों में पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और औद्योगिक विकास से जुड़ी परियोजनाओं को गति देने का प्रयास किया गया है। सरकार का दावा है कि उत्तर प्रदेश अब केवल जनसंख्या के आधार पर नहीं, बल्कि विकास और निवेश के पैमाने पर भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है।
कानून-व्यवस्था बना सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा
योगी सरकार की सबसे अधिक चर्चा कानून-व्यवस्था को लेकर हुई। सरकार ने अपराध नियंत्रण को अपनी प्राथमिकता बताया और संगठित अपराध, माफिया गतिविधियों तथा भू-माफियाओं के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाए।
प्रदेश में पुलिस आधुनिकीकरण, आपातकालीन सेवा 112 के विस्तार, साइबर अपराध नियंत्रण और महिला सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों को भी आगे बढ़ाया गया। समर्थकों का मानना है कि कानून-व्यवस्था में सुधार ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हालांकि विपक्ष समय-समय पर पुलिस कार्यशैली, कथित मुठभेड़ों और मानवाधिकार संबंधी मुद्दों को लेकर सवाल भी उठाता रहा है।
एक्सप्रेसवे का प्रदेश बना उत्तर प्रदेश
यदि योगी शासन की किसी उपलब्धि को सबसे अधिक दृश्य रूप में देखा जा सकता है, तो वह है बुनियादी ढांचे का विस्तार।
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर, नए एयरपोर्ट और औद्योगिक गलियारों ने प्रदेश के विकास मॉडल को नई पहचान दी है। जिन क्षेत्रों को कभी पिछड़ा माना जाता था, वहां अब औद्योगिक निवेश और संपर्क सुविधाओं की नई संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क और परिवहन नेटवर्क में सुधार का प्रभाव आने वाले वर्षों में रोजगार और उद्योगों पर और स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
अयोध्या से काशी तक सांस्कृतिक पुनर्जागरण
योगी सरकार के कार्यकाल की एक प्रमुख पहचान धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और विकास को भी माना जाता है।
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़ी आधारभूत संरचना, काशी विश्वनाथ धाम परियोजना, मथुरा-वृंदावन क्षेत्र के विकास और विभिन्न धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण ने उत्तर प्रदेश को धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बना दिया है।
सरकार का दावा है कि इससे पर्यटन, स्थानीय रोजगार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नया बल मिला है।
निवेश आया, लेकिन रोजगार सबसे बड़ा सवाल
पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने बड़े निवेश सम्मेलनों के माध्यम से लाखों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आकर्षित करने का दावा किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, रक्षा उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण और विनिर्माण क्षेत्रों में कई परियोजनाएं शुरू हुई हैं।
फिर भी आम जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल रोजगार को लेकर बना हुआ है।
प्रदेश के लाखों युवा आज भी प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। निजी क्षेत्र में रोजगार बढ़ा है, लेकिन उसकी गुणवत्ता और वेतन स्तर को लेकर बहस जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश को रोजगार में बदलना सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
कृषि क्षेत्र में मिली-जुली तस्वीर
कृषि प्रधान राज्य होने के कारण उत्तर प्रदेश में किसानों की स्थिति हमेशा राजनीतिक विमर्श का केंद्र रही है।
सरकार ने सिंचाई, फसल बीमा, कृषि यंत्रीकरण और प्राकृतिक खेती जैसे विषयों पर कई योजनाएं चलाईं। वहीं दूसरी ओर आवारा पशु, बढ़ती लागत, मौसम की अनिश्चितता और छोटे किसानों की आय जैसे मुद्दे अब भी चुनौती बने हुए हैं।
कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में केवल उत्पादन बढ़ाने के बजाय किसानों की आय बढ़ाने पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता होगी।
स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार की चुनौती
कोविड-19 महामारी के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कई सुधार किए गए। नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, जिला अस्पतालों के विस्तार और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के प्रयास हुए।
शिक्षा क्षेत्र में भी स्कूलों के कायाकल्प, डिजिटल सुविधाओं और आधारभूत संरचना में सुधार देखने को मिला।
फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उच्च शिक्षा तक पहुंच जैसे मुद्दे अभी पूरी तरह हल नहीं हुए हैं।
आगे का रास्ता
योगी सरकार का पहला चरण कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक नियंत्रण के लिए याद किया जाएगा। दूसरा चरण बुनियादी ढांचे और धार्मिक पर्यटन के विस्तार के लिए चर्चा में रहेगा।
लेकिन आने वाले वर्षों की राजनीति रोजगार, कृषि आय, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योगों के वास्तविक परिणामों पर निर्भर करेगी।
उत्तर प्रदेश आज बदलाव के एक ऐसे दौर में खड़ा है जहां बड़ी परियोजनाएं और बड़े दावे दोनों मौजूद हैं। अब जनता यह देखना चाहती है कि इन परियोजनाओं का लाभ गांवों, कस्बों और आम परिवारों तक कितनी तेजी से पहुंचता है।
यही तय करेगा कि योगी सरकार का यह लंबा कार्यकाल केवल निर्माण और घोषणाओं के लिए याद रखा जाएगा या फिर जनजीवन में आए स्थायी बदलाव के लिए भी।
Ankit Awasthi








