तीन प्रमुख निर्माण कार्य समय पर पूरे होने की संभावना कम, वैकल्पिक कच्चे मार्ग बारिश में बन सकते हैं खतरा
उन्नाव। जनपद में विभिन्न स्थानों पर निर्माणाधीन पुलियों का कार्य मानसून से पहले पूरा होता नहीं दिख रहा है। मौसम विभाग द्वारा 26 जून के आसपास मानसून के आगमन की संभावना जताई गई है, लेकिन जिले में कई महत्वपूर्ण मार्गों पर पुलिया निर्माण अधूरा है। ऐसे में बारिश शुरू होते ही हजारों लोगों के आवागमन पर असर पड़ सकता है।
स्थिति यह है कि जहां एक ओर उन्नाव-हरदोई मार्ग पर दोस्तीनगर पुलिया का निर्माण कार्य अभी आधा ही पूरा हो पाया है, वहीं सफीपुर और पुरवा क्षेत्र में नहरों व रजबहों में पानी भर जाने के कारण निर्माण कार्य पिछले कई सप्ताह से बंद पड़ा है। फिलहाल लोगों को कच्चे और अस्थायी मार्गों के सहारे यात्रा करनी पड़ रही है, जो बारिश के दौरान पूरी तरह बाधित हो सकते हैं।
दोस्तीनगर पुलिया: आधा काम बाकी, एक माह और लग सकता है समय
उन्नाव-हरदोई राज्य मार्ग पर दोस्तीनगर स्थित शारदा नहर पर लगभग 1.93 करोड़ रुपये की लागत से नई पुलिया का निर्माण कराया जा रहा है। छह अप्रैल को शुरू हुआ यह कार्य मई में नहर में पानी आने के कारण करीब एक माह तक बंद रहा।
वर्तमान में निर्माण कार्य दोबारा शुरू तो हो गया है, लेकिन अभी तक केवल लगभग 50 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है। पुलिया के स्लैब की ढलाई से पहले शटरिंग का कार्य चल रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार स्लैब ढलाई के बाद उसे मजबूत होने में लगभग 15 दिन का समय लगेगा। ऐसे में निर्माण कार्य पूरा होने में अभी एक माह से अधिक का समय लग सकता है।
उधर वाहनों को अब भी चकलवंशी चौराहे से डायवर्ट किया जा रहा है। यदि इसी बीच मानसून सक्रिय हो गया तो वैकल्पिक कच्चा मार्ग भी प्रभावित हो सकता है और लोगों को लंबा चक्कर लगाने की मजबूरी झेलनी पड़ सकती है।
सफीपुर क्षेत्र में एक माह से ठप पड़ा निर्माण कार्य
सफीपुर कस्बे को बांगरमऊ-लखनऊ मार्ग से जोड़ने वाली शारदा नहर शाखा पर करीब 52 लाख रुपये की लागत से नई चौड़ी पुलिया का निर्माण कराया जा रहा है। लेकिन नहर में पानी छोड़े जाने के बाद से यह कार्य पिछले एक माह से पूरी तरह बंद है।
इस मार्ग पर निर्भर पीखी, नैनीखेड़ा, ओसियां, डकौली, गुरधरी, अटवा मोहाल, रैय्यामऊ, रहीमाबाद, मुंडा और लच्छीखेड़ा समेत लगभग 30 गांवों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थिति और गंभीर इसलिए है क्योंकि पुराने संकरे पुल को उसकी जर्जर स्थिति के चलते प्रतिबंधित घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद ग्रामीण चार किलोमीटर अतिरिक्त दूरी बचाने के लिए उसी पुल का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
पुरवा क्षेत्र में भी रजबहे का पानी बना बाधा
मौरावां-पुरवा मार्ग से बाबा बिल्लेश्वर धाम होते हुए शीतलगंज जाने वाले मार्ग पर 42 लाख रुपये की लागत से पुलिया निर्माण कार्य चल रहा है। लेकिन रजबहे में पानी भर जाने के कारण यहां भी निर्माण कार्य करीब एक माह से बंद पड़ा है।
पीडब्ल्यूडी द्वारा पाइप डालकर अस्थायी मार्ग तो बनाया गया है, लेकिन यह पूरी तरह कच्चा है। वर्तमान में वाहन चालक इसी रास्ते का उपयोग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की पहली तेज बारिश में यह मार्ग फिसलनभरा और जोखिमपूर्ण हो सकता है।
बारिश से पहले प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
जनपद के तीन महत्वपूर्ण मार्गों पर निर्माणाधीन पुलियों का समय पर पूरा न होना केवल विकास कार्यों में देरी का मामला नहीं है, बल्कि यह आम लोगों की सुरक्षा और सुविधा से भी जुड़ा विषय है।
ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पताल, बाजार, विद्यालय और तहसील मुख्यालय तक पहुंचने के लिए यही मार्ग प्रमुख साधन हैं। यदि बारिश के दौरान वैकल्पिक मार्ग बह जाते हैं या कीचड़ से भर जाते हैं तो हजारों लोगों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन और संबंधित विभागों को मानसून से पहले अस्थायी मार्गों को मजबूत बनाने, जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा निर्माण कार्यों की निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि बारिश के मौसम में लोगों को अनावश्यक परेशानियों से बचाया जा सके।
क्या कहते हैं अधिकारी?
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) सुबोध कुमार के अनुसार, दोस्तीनगर पुलिया पर निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अगले दो से तीन दिनों में स्लैब ढलाई का कार्य पूरा कर लिया जाएगा और शेष कार्यों को भी शीघ्र समाप्त करने का प्रयास किया जाएगा।
हालांकि जमीनी हालात और मानसून की संभावित दस्तक को देखते हुए लोगों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या विभाग समय रहते इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को पूरा कर पाएगा या फिर बरसात के मौसम में अधूरी पुलियां आमजन की मुश्किलों का कारण बनेंगी।








