NCERT के नए पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव
NEP-2020 के अनुरूप तैयार नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक में पहली बार शामिल हुआ आपातकाल का अध्याय, लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की समझ पर रहेगा विशेष जोर
नई दिल्ली। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के तहत स्कूली शिक्षा में किए जा रहे व्यापक बदलावों के क्रम में अब कक्षा-9 के विद्यार्थियों को वर्ष 1975 से 1977 के बीच लागू रहे आपातकाल के बारे में विस्तार से पढ़ाया जाएगा। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की इस महत्वपूर्ण घटना को पहली बार कक्षा-9 की नई सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में प्रमुखता से शामिल किया गया है। नई पुस्तक में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के समक्ष आई गंभीर चुनौतियों में से एक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ) के अनुरूप तैयार की गई सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी : इंडिया एंड बियॉन्ड’ में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक लागू रहे आपातकाल की पृष्ठभूमि, उसके कारणों, प्रभावों तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर पड़े असर का उल्लेख किया गया है। पुस्तक में बताया गया है कि इस अवधि के दौरान देश में आंतरिक आपातकाल घोषित किया गया था, जिसके बाद कई मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था। प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई थी तथा अनेक विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विरोधियों को हिरासत में लिया गया था।
पाठ्यपुस्तक में इस विषय को केवल एक राजनीतिक घटना के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली, नागरिक स्वतंत्रताओं के महत्व तथा संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों की उपयोगिता को समझाने के संदर्भ में शामिल किया गया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस अध्याय के माध्यम से विद्यार्थियों को लोकतंत्र की मजबूती, संवैधानिक मर्यादाओं और नागरिक अधिकारों की रक्षा के महत्व के बारे में बेहतर समझ विकसित करने में सहायता मिलेगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल तथ्यों तक सीमित न रखते हुए उनमें विश्लेषणात्मक सोच, संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान तथा ऐतिहासिक घटनाओं को व्यापक परिप्रेक्ष्य में समझने की क्षमता विकसित करना है। इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम में ऐसे विषयों को शामिल किया जा रहा है, जो भारतीय समाज, राजनीति और लोकतांत्रिक व्यवस्था के विकास को समझने में सहायक हों।
नई पाठ्यपुस्तकों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है और शिक्षा जगत में इस बदलाव को लेकर चर्चा भी तेज हो गई है। कई शिक्षाविद इसे विद्यार्थियों को देश के राजनीतिक इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों से अवगत कराने की दिशा में एक सकारात्मक पहल मान रहे हैं। वहीं, कुछ विशेषज्ञों का मत है कि ऐसे संवेदनशील विषयों को संतुलित, तथ्यपरक और बहुआयामी दृष्टिकोण के साथ पढ़ाया जाना चाहिए, ताकि छात्र-छात्राएं स्वयं ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में निष्पक्ष और तार्किक समझ विकसित कर सकें।
नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक के लागू होने के साथ ही कक्षा-9 के विद्यार्थियों को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास के इस महत्वपूर्ण दौर का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा, जिससे वे लोकतांत्रिक संस्थाओं, संवैधानिक अधिकारों और नागरिक कर्तव्यों के महत्व को अधिक गहराई से समझ सकेंगे।








