अयोध्या, 14 जुलाई। श्री हनुमानगढ़ी परिसर स्थित बाबा ओमप्रकाश बैरागी आश्रम में मंगलवार शाम आयोजित श्रीहनुमान चालीसा प्रवचन में आध्यात्मिक चेतना और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. महेश योगी जी महाराज ने गोस्वामी तुलसीदास रचित श्रीहनुमान चालीसा के प्रथम दोहे “श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधार…” का लगभग एक घंटे तक गहन भावार्थ प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि श्रीहनुमान चालीसा केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए जीवन-दर्शन, आत्मशुद्धि, चरित्र निर्माण और राष्ट्र चेतना का कालजयी ग्रंथ है। उन्होंने बताया कि महाकवि गोस्वामी तुलसीदास ने हनुमानजी की असीम कृपा और दिव्य प्रेरणा से इस अमर काव्य की रचना की, जो आज भी करोड़ों लोगों के आध्यात्मिक जीवन का आधार बना हुआ है।
स्वामी डॉ. महेश योगी ने कहा कि भगवान श्रीराम के परम भक्त श्रीहनुमान शक्ति, सेवा, समर्पण, विनम्रता और अटूट भक्ति के साक्षात स्वरूप हैं। उनके जीवन का प्रत्येक प्रसंग मनुष्य को कर्तव्य, अनुशासन, त्याग, राष्ट्रधर्म और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि श्रद्धा और विश्वास के साथ श्रीहनुमान चालीसा का नियमित पाठ भय, निराशा और मानसिक अशांति को दूर कर आत्मबल, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना का विकास करता है।
प्रथम दोहे के प्रत्येक शब्द का आध्यात्मिक अर्थ स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि गुरु के चरणों की रज मन रूपी दर्पण को निर्मल करती है और मन की शुद्धि के बिना ईश्वर की अनुभूति संभव नहीं है। उन्होंने श्रीहनुमान के श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के प्रति निष्कलुष प्रेम, गुरु-भक्ति और समर्पण को जीवन का सर्वोच्च आदर्श बताया।
उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन में बढ़ते तनाव, भौतिकता और नैतिक चुनौतियों के बीच श्रीहनुमान चालीसा पहले से अधिक प्रासंगिक हो गई है। यह केवल धार्मिक पाठ नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, सेवा, साहस, राष्ट्रभक्ति और मानवीय मूल्यों का जीवंत संदेश है। यदि युवा पीढ़ी श्रीहनुमान के आदर्शों को अपने जीवन में उतार ले, तो समाज और राष्ट्र का भविष्य उज्ज्वल बन सकता है।
प्रवचन के दौरान उपस्थित श्रद्धालु पूरे समय मंत्रमुग्ध होकर भावार्थ का श्रवण करते रहे। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि उन्होंने पहली बार श्रीहनुमान चालीसा के प्रत्येक शब्द का इतना सरल, गहन और जीवनोपयोगी विवेचन सुना। उनके अनुसार यह प्रवचन केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक मार्गदर्शन था।
कार्यक्रम में मातृभूमि सेवा मिशन उत्तर प्रदेश की रायबरेली एवं लखनऊ इकाई से प्रदीप पांडेय, प्रो. प्रवेश नारायण सिंह, रामानुज मिश्रा ‘ज्ञानी जी’, विजय सिंह, भगवत प्रताप सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। अंत में सभी ने सामूहिक रूप से श्रीहनुमान चालीसा का पाठ कर समाज, राष्ट्र और विश्व के कल्याण की प्रार्थना की।








