अमृत उजाला
लखनऊ । देश में पेलेट गन को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इसी बीच उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सुलखान सिंह ने अपने आधिकारिक फेसबुक पोस्ट में पेलेट गन और भीड़ नियंत्रण में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरणों को लेकर अपना पक्ष रखा है। वहीं, जाने-माने प्लास्टिक एवं कॉस्मेटिक सर्जन डॉ. विवेक गुप्ता ने बताया है कि यदि किसी व्यक्ति को पेलेट गन से चोट लग जाए तो सबसे पहले क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह ने क्या कहा?
सुलखान सिंह ने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि पेलेट गन मूल रूप से 12 बोर ब्रीच लोडिंग गन है। पुलिस के पास इंडियन ऑर्डिनेंस फैक्ट्री निर्मित 12 बोर गन और पम्प-एक्शन गन उपलब्ध हैं, जिनका इस्तेमाल हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
उन्होंने कहा कि इन हथियारों का उद्देश्य जान लेना नहीं, बल्कि भीड़ को तितर-बितर करना होता है। उनके अनुसार, सरकार की जिम्मेदारी है कि पुलिस को ऐसे कम घातक (Less-Lethal) उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए न्यूनतम नुकसान हो।
पूर्व डीजीपी ने यह भी लिखा कि शॉक बैटन और पॉलीकार्बोनेट लाठियां भी इसी सोच के तहत अपनाई गई हैं। उनका दावा है कि ये पारंपरिक बांस की लाठियों की तुलना में गंभीर चोट और फ्रैक्चर की संभावना कम करती हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि भीड़ नियंत्रण में इस्तेमाल होने वाले इन वैकल्पिक उपकरणों पर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पुलिस का पक्ष मजबूती से रखा जाए।
भारत में पेलेट गन का इस्तेमाल कब हुआ?
भारत में पेलेट गन का सबसे चर्चित इस्तेमाल 2010 में जम्मू-कश्मीर में शुरू हुआ था। इसके बाद 2016 में हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद भड़के व्यापक हिंसक प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर पेलेट गन का इस्तेमाल किया। उस समय बड़ी संख्या में लोगों की आंखों और चेहरे पर गंभीर चोटें आई थीं, जिसके बाद पेलेट गन के उपयोग को लेकर देश और विदेश में व्यापक बहस छिड़ गई।
हाल के दिनों में भी भीड़ नियंत्रण के दौरान इसके इस्तेमाल को लेकर चर्चा तेज हुई है और इस पर कानूनी व सामाजिक बहस जारी है।
पेलेट गन से चोट लगे तो क्या करें?
जाने-माने प्लास्टिक एवं कॉस्मेटिक सर्जन डॉ. विवेक गुप्ता के अनुसार, पेलेट गन को कम घातक हथियार माना जाता है, लेकिन यदि इसे नजदीक से चलाया जाए तो यह आंख, चेहरा और शरीर के संवेदनशील अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।
उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति में सबसे पहली प्राथमिकता आंखों की सुरक्षा होनी चाहिए। यदि आंख में या उसके आसपास पेलेट लगी हो, धुंधला दिखाई दे रहा हो, तेज दर्द हो, खून निकल रहा हो या देखने में किसी तरह की समस्या हो रही हो, तो इसे मेडिकल इमरजेंसी मानते हुए तुरंत अस्पताल जाना चाहिए। आंख को रगड़ना, दबाना या स्वयं पेलेट निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
यदि पेलेट त्वचा में धंस गई हो, तो उसे भी खुद निकालने का प्रयास नहीं करना चाहिए। अस्पताल में डॉक्टर जांच कर तय करेंगे कि उसे निकालना जरूरी है या नहीं। कई मामलों में शरीर के भीतर मौजूद पेलेट बिना किसी नुकसान के स्थिर रहती है और उसे निकालने की आवश्यकता नहीं पड़ती। जबकि गलत तरीके से निकालने का प्रयास नसों, रक्तवाहिनियों और आसपास के ऊतकों को अधिक नुकसान पहुंचा सकता है।
डॉ. गुप्ता के अनुसार घाव को साफ रखना, डॉक्टर की सलाह के अनुसार ड्रेसिंग कराना, आवश्यकता होने पर टिटनेस, दर्द की दवा, एंटीबायोटिक या अन्य उपचार लेना जरूरी है। बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई भी दवा शुरू नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि कई बार सतही पेलेट समय के साथ स्वयं बाहर निकल जाती हैं, जबकि गहराई में मौजूद पेलेट के चारों ओर शरीर फाइब्रस कैप्सूल बना देता है। यदि वह किसी प्रकार की परेशानी नहीं कर रही हो तो उसे निकालना आवश्यक नहीं होता।
घाव भरने के बाद यदि चेहरे या त्वचा पर निशान रह जाएं तो माइक्रोनीडलिंग, लेजर, स्कार रिविजन या अन्य आधुनिक स्किन ट्रीटमेंट्स के जरिए उन्हें काफी हद तक कम किया जा सकता है। कौन-सा उपचार उपयुक्त होगा, यह चोट की गहराई और स्थान पर निर्भर करता है।
विशेषज्ञों की सलाह
डॉ. विवेक गुप्ता का कहना है कि पेलेट गन की चोट को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। सबसे बड़ा खतरा केवल त्वचा पर निशान नहीं, बल्कि आंख, नसों और चेहरे की गहरी संरचनाओं को होने वाली क्षति होती है। इसलिए ऐसी किसी भी घटना में घबराने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से उपचार लेना चाहिए।
नोट: यह खबर पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह की फेसबुक पोस्ट और प्लास्टिक एवं कॉस्मेटिक सर्जन डॉ. विवेक गुप्ता द्वारा साझा की गई चिकित्सकीय जानकारी पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार संबंधित व्यक्तियों के हैं।







