उत्तर प्रदेश परिवहन निगम का नारा भले ही आपका अपना साथी हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। हाल ही में लखनऊ के विकास नगर डिपो की जनरथ बस (UP 78 FN 8772) रविवार शाम 8 बजे बीच रास्ते में बंद हो गई, जिससे 25 यात्री घंटों परेशान रहे। यात्रियों की शिकायतों के बावजूद निगम के अधिकारियों ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की। इसी तरह प्रयाग डिपो की बस (UP 78 FN 8541) मोहनलालगंज के पास दगा दे गई, जिसके बाद असहाय यात्रियों को अपने खुद के पैसों से निजी साधनों का सहारा लेकर मंजिल तक पहुंचना पड़ा।
भीषण गर्मी में ओवरहीटिंग और एसी खराब होने का संकट
गर्मी का मौसम आते ही रोडवेज की लग्जरी एसी बसों की पोल खुलने लगती है। रखरखाव में भारी लापरवाही के कारण अवध डिपो सहित विभिन्न रूटों की आधा दर्जन एसी बसों के एयर कंडीशनर बीच रास्ते में ठप पड़ गए। मुसाफिरखाना के पास लखनऊ-वाराणसी रूट की बस का इंजन ओवरहीट होने के कारण गाड़ी को रास्ते में ही खड़ा करना पड़ा। भीषण तपन में एसी बंद होने पर यात्रियों को बसों के दरवाजे खोलकर सफर करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
मेंटेनेंस की अनदेखी से रोजाना डिपो में खड़ी हो रहीं बसें
प्रॉपर्टी मेंटेनेंस और समय पर स्पेयर पार्ट्स न मिलने की वजह से यूपी रोडवेज की साख को भारी धक्का लग रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, बदहाली और तकनीकी खराबी के चलते औसतन 35 लग्जरी एसी बसें रोज डिपो में खड़ी रहने को विवश हैं। मेंटेनेंस में की जा रही लापरवाही न केवल परिवहन निगम के राजस्व को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि यात्रियों के मन में सरकारी बसों की विश्वसनीयता को भी खत्म कर रही है।
रोडवेज की बदहाली से निजी डग्गामार सिंडिकेट को बढ़ावा
रोडवेज की लचर सेवाओं का सीधा फायदा निजी डग्गामार बस चालकों को मिल रहा है। सरकारी एसी बसों की अनिश्चितता और खराब हालत से तंग आकर यात्री अब निजी बसों का रुख कर रहे हैं। कम किराये और बेहतर उपलब्धता का फायदा उठाकर डग्गामार बसों का सिंडिकेट हर रूट पर मजबूत हो रहा है। अगर परिवहन निगम ने जल्द अपनी खटारा बसों और लचर व्यवस्था में सुधार नहीं किया, तो यात्री पूरी तरह से रोडवेज से दूरी बना लेंगे।
उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की एसी और जनरथ बसें खराब रखरखाव के कारण लगातार बीच रास्ते में ठप हो रही हैं। भीषण गर्मी में ओवरहीटिंग और एसी खराब होने से यात्रियों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है, और शिकायत के बावजूद वैकल्पिक बसें नहीं दी जा रही हैं।







