बच्चों संग हुआ सामूहिक राष्ट्रगीत गान
वाराणसी। राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शुक्रवार को नई सड़क स्थित कोदई चौकी पर प्रणाम वन्दे मातरम् समिति के तत्वावधान में भव्य राष्ट्रभक्ति एवं अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता और बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के चित्र पर माल्यार्पण, पुष्पांजलि तथा सामूहिक रूप से ‘वन्दे मातरम्’ के गायन के साथ हुआ।
समिति के अध्यक्ष अनुप जायसवाल ने कहा कि वर्ष 2026 राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् की रचना के 150 वर्ष पूरे होने का ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना का सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत बना। लाखों स्वतंत्रता सेनानियों ने इसी गीत के उद्घोष के साथ आजादी की लड़ाई लड़ी।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1905 में वाराणसी में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में भी वन्दे मातरम् के राष्ट्रीय महत्व पर विशेष चर्चा हुई थी। वहीं स्वतंत्रता सेनानी सरला देवी चौधरानी के राष्ट्रगीत गायन ने इसे राष्ट्रीय आंदोलन का सशक्त स्वर बनाया। उन्होंने यह भी कहा कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान तथा ‘वन्दे मातरम्’ को राष्ट्रगीत के रूप में समान सम्मान प्रदान करने का निर्णय लिया था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं पूर्व पार्षद गिरीश श्रीवास्तव ने कहा कि वन्दे मातरम् किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की आस्था, स्वाभिमान और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने नई पीढ़ी को इसके गौरवशाली इतिहास से परिचित कराने की आवश्यकता पर बल दिया।
समारोह के दौरान विद्यालय के बच्चों के साथ सामूहिक राष्ट्रगीत गान किया गया तथा उन्हें मिठाई वितरित की गई। उपस्थित लोगों ने बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पवर्षा कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का संचालन धीरेंद्र शर्मा एवं सोमनाथ यादव ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन ओमप्रकाश यादव बाबू और चन्द्र विजय सिंह ने दिया। इस अवसर पर शंकर जायसवाल, आदित्य गोयनका, मंगलेश जायसवाल, एडवोकेट सुनील कन्नौजिया, मनीष चौरसिया, धर्मचंद, प्रदीप जायसवाल, अखिल वर्मा, राहुल जायसवाल, चंदन केशरी, कुँवर यादव, शिवम यादव, प्री कुमार माणिक सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं राष्ट्रप्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन “वन्दे मातरम्”, “भारत माता की जय” और “जय हिन्द” के उद्घोष







