उत्तर मध्य रेलवे की नई पहल
टीटीई की पूरी टिकट जांच प्रक्रिया होगी रिकॉर्ड, पारदर्शिता बढ़ाने और विवादों के समाधान के लिए शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट
प्रयागराज। उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल ने टिकट जांच व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 24 जुलाई 2026 से प्रयागराज एक्सप्रेस में बॉडी-वॉर्न कैमरों से लैस टिकट जांच कर्मचारियों (टीटीई) ने टिकट चेकिंग अभियान शुरू कर दिया है। अब टिकट जांच के दौरान पूरी प्रक्रिया कैमरे में रिकॉर्ड होगी, जिससे यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों के बीच होने वाले विवादों की स्थिति में सटीक रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।
यह पायलट परियोजना मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) रजनीश अग्रवाल के नेतृत्व तथा वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (कोचिंग) हरिमोहन के मार्गदर्शन में शुरू की गई है। इसकी शुरुआत प्रयागराज–नई दिल्ली प्रयागराज एक्सप्रेस (12417/12418) और श्रमशक्ति एक्सप्रेस (12451/12452) में की गई है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, बॉडी-वॉर्न कैमरों के उपयोग से टिकट जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी तथा यात्रियों और टीटीई के बीच किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति में वीडियो रिकॉर्डिंग महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में काम करेगी। इससे सुरक्षा व्यवस्था भी और मजबूत होगी।
पहले भी कई उपलब्धियां हासिल कर चुकी है प्रयागराज एक्सप्रेस
प्रयागराज एक्सप्रेस पहले भी कई उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए जानी जाती रही है। यह आईएसओ प्रमाणन प्राप्त करने वाली प्रमुख ट्रेनों में शामिल रही है। इसके अलावा 24 एलएचबी कोच, 600 मीटर से अधिक लंबाई, सबसे पहले हैंड हेल्ड टर्मिनल (HHT) मशीनों के उपयोग जैसी उपलब्धियां भी इसके नाम दर्ज हैं। इस ट्रेन पर एक डॉक्यूमेंट्री भी बनाई जा चुकी है और “मैं प्रयागराज एक्सप्रेस हूं…” शीर्षक से विशेष गीत भी तैयार किया गया था। हर वर्ष इस ट्रेन का वार्षिकोत्सव भी मनाया जाता है।
अब बॉडी-वॉर्न कैमरे से टिकट जांच शुरू होने के साथ प्रयागराज एक्सप्रेस ने एक और उपलब्धि अपने नाम दर्ज कर ली है। यह उत्तर मध्य रेलवे की पहली ट्रेन बन गई है, जिसमें इस तकनीक के माध्यम से टिकट चेकिंग की शुरुआत की गई है।







