लखनऊ: उत्तर प्रदेश के आयुष विभाग में एक बेहद चौंकाने वाले और बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। बिना NEET की परीक्षा दिए और बिना किसी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई किए, घर बैठे 10 से 15 लाख रुपये खर्च करके आयुर्वेदिक एवं यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड में फर्जी रजिस्ट्रेशन कराकर लोग रजिस्टर्ड डॉक्टर बन गए। इस बड़े सिंडिकेट का खुलासा खुद बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. शैलेश कुमार राय ने किया है।
उपाध्यक्ष ने CM योगी को पत्र लिखकर की CBI जांच की मांग
बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. शैलेश कुमार राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चार पन्नों का शिकायती पत्र भेजकर इस पूरे मामले की CBI जांच कराने की सिफारिश की है। उन्होंने पत्र में फर्जीवाड़े में शामिल बोर्ड के अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही, उपाध्यक्ष ने प्रदेश के कई जिलों के पते पर जारी किए गए फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबरों और आवेदकों के नामों की सूची भी मुख्यमंत्री को सौंपी है।
दिल्ली से आई टीम की जांच और मामला दबाने का आरोप
डॉ. शैलेश के अनुसार, पिछले साल अप्रैल में नेशनल कमिशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (NCISM) की एक टीम दिल्ली से यूपी पहुंची थी। शुरुआत में 5 संदिग्ध मामलों की जांच की गई, लेकिन दस्तावेजों की पड़ताल में कुल 41 फर्जी रजिस्ट्रेशन सामने आए। आरोप है कि बोर्ड के अधिकारियों ने इन 41 फर्जी रजिस्ट्रेशनों का ब्योरा रिकॉर्ड में रखने के बजाय मामले को दबाने के लिए गुपचुप तरीके से इन्हें निरस्त कर दिया। दूसरी ओर, बोर्ड के रजिस्ट्रार अखिलेश वर्मा का कहना है कि सत्यापन के बाद फर्जी पाए जाने वाले मामलों में FIR दर्ज कराई जाएगी। हालांकि, इस पूरे प्रकरण पर आयुष विभाग के प्रमुख सचिव रंजन कुमार ने साधी हुई चुप्पी बरकरार रखी है।
संगठित गिरोह का जाल, बाहरी राज्यों के फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल
इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का संगठित गिरोह काम कर रहा था, जो फर्जी मार्कशीट, BAMS व BUMS की डिग्रियां, इंटर्नशिप सर्टिफिकेट और NOC तैयार करवाता था। किसी को शक न हो, इसके लिए यूपी के बजाय मुख्य रूप से राजस्थान और मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के नाम पर दस्तावेज बनाए जाते थे। सामान्य प्रक्रिया के तहत 5 साल की पढ़ाई और 1 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप के बाद ही बोर्ड में रजिस्ट्रेशन मिलता है, लेकिन इस गिरोह ने जौनपुर, सीतापुर, मेरठ, गाजियाबाद, लखनऊ, बरेली और आजमगढ़ समेत 20 से अधिक जिलों में फर्जी डॉक्टरों का जाल फैला दिया।





