क्या अमेरिकी चुनाव से पहले बड़ा कदम उठाएंगे ट्रंप?
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध सात महीने से ज्यादा लंबा खिंच चुका है। सैन्य क्षमता में कई गुना मजबूत होने के बावजूद अमेरिका ईरान के खिलाफ निर्णायक बढ़त हासिल नहीं कर पाया है। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने सैन्य और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर चुनौती बढ़ती दिखाई दे रही है। अगले महीने होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप प्रशासन की गतिविधियों ने इन अटकलों को और हवा दी है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ कोई बड़ा कदम उठा सकता है।
हाल के दिनों में अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है। एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, एम्फीबियस ग्रुप और अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती के साथ क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य जमावड़ा बढ़ रहा है। ईरान के संभावित जवाबी हमलों से बचाव के लिए अतिरिक्त पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम भी तैनात किए जा रहे हैं।
कैंप डेविड में हुई गोपनीय बैठक
ईरान को लेकर ट्रंप प्रशासन के भीतर उच्चस्तरीय रणनीतिक बैठकों का दौर भी जारी है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कैंप डेविड में राष्ट्रपति ट्रंप की वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा टीम की कई घंटे लंबी अघोषित बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ और शीर्ष सैन्य अधिकारी डैन केन शामिल हुए। बताया गया कि बैठक में ईरान नीति के साथ यमन में सऊदी अरब और हूती संघर्ष से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। आगे की रणनीति और सैन्य विकल्पों पर भी विचार किया गया।
पश्चिम एशिया में बढ़ा अमेरिकी सैन्य जमावड़ा
अमेरिका पश्चिम एशिया में करीब 9,000 से 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेज रहा है। इनमें यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट के नेतृत्व वाला स्ट्राइक ग्रुप और यूएसएस मेकिन आइलैंड से जुड़ा एम्फीबियस ग्रुप शामिल है।
इसके अलावा यूएसएस जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश और यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन एयरक्राफ्ट कैरियर पहले से क्षेत्र में मौजूद हैं। इनके साथ यूएसएस बॉक्सर एम्फीबियस ग्रुप भी समुद्री अभियानों के लिए तैनात है।
इस तरह पश्चिम एशिया में अमेरिकी नौसैनिक शक्ति में तीन एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और दो एम्फीबियस ग्रुप शामिल हो गए हैं। साथ ही ईरान की ओर से संभावित मिसाइल या ड्रोन हमलों से अमेरिकी ठिकानों और सैनिकों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम लगाए जा रहे हैं।
मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप पर दबाव
ईरान युद्ध का लंबा खिंचना ट्रंप प्रशासन के लिए राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है। अमेरिका में अगले महीने होने वाले मध्यावधि चुनावों को राष्ट्रपति के कार्यकाल के पहले दो वर्षों और उनकी नीतियों की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।
ईरान के खिलाफ युद्ध में निर्णायक सफलता नहीं मिलने और सैन्य अभियान की बढ़ती लागत को लेकर अमेरिकी जनता के एक हिस्से में असंतोष की खबरें सामने आई हैं। ऐसे में ट्रंप के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ ईरान पर दबाव बनाए रखना और दूसरी तरफ घरेलू राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत करना।
क्या कोई बड़ा सैन्य कदम उठाने की तैयारी है?
पश्चिम एशिया में बढ़ती अमेरिकी सैन्य तैनाती और शीर्ष अधिकारियों की गोपनीय बैठकों ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि क्या ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ किसी बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है। हालांकि, अभी तक अमेरिका की ओर से ऐसी किसी अंतिम योजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को संभावित सैन्य विकल्पों की तैयारी के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसे ट्रंप के किसी निश्चित आगामी हमले या अभियान की घोषणा मानना जल्दबाजी होगी। आने वाले दिनों में अमेरिकी सैन्य तैनाती और ट्रंप प्रशासन के बयानों से तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।





















