बोले- अभावों को ढाल नहीं, संघर्ष का मार्ग बनाया
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लोकभवन सभागार में भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण का विमोचन किया। इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने उनके जीवन को संघर्ष, परिश्रम और दृढ़ संकल्प की प्रेरणादायक यात्रा बताया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रामनाथ कोविंद ने अभावों को अपनी कमजोरी या आगे बढ़ने में बाधा नहीं बनने दिया, बल्कि उन्हें संघर्ष का मार्ग बनाया। उन्होंने कहा कि बड़ा वही होता है, जिसमें कठिन परिस्थितियों से लड़ने और विपरीत हालात में भी आगे बढ़ने की क्षमता होती है। यही जज्बा रामनाथ कोविंद को महानता के शिखर तक ले गया।
प्रतिकूल परिस्थितियों से लड़कर हासिल किया मुकाम
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनाथ कोविंद का जीवन युवाओं और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के परौंख गांव में एक साधारण परिवार में जन्मे कोविंद ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा हासिल की और अपने परिश्रम से सार्वजनिक जीवन में विशिष्ट स्थान बनाया।
योगी ने कहा कि रामनाथ कोविंद ने गांव के विद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उच्च शिक्षा हासिल की और अधिवक्ता के रूप में वंचितों तथा गरीबों की आवाज बने। इसके बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कदम रखा और विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए राज्यसभा सदस्य, बिहार के राज्यपाल और अंततः भारत के राष्ट्रपति के पद तक पहुंचे।
‘घर कच्चे थे, लेकिन इरादे पक्के थे’
मुख्यमंत्री ने रामनाथ कोविंद के जीवन संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी परिस्थितियां भले ही कठिन थीं, लेकिन उनके संकल्प मजबूत थे। उन्होंने कहा कि महानता केवल अनुकूल परिस्थितियों में आगे बढ़ने से नहीं मिलती, बल्कि प्रतिकूल परिस्थितियों का साहस के साथ सामना करने से हासिल होती है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब परिस्थितियां अनुकूल हों तो लोककल्याण और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए। वहीं, कठिन समय में संघर्ष से पीछे हटने के बजाय चुनौतियों का सामना करने का जज्बा बनाए रखना चाहिए।
उत्तर प्रदेश की राजधानी में हिंदी संस्करण का विमोचन
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनाथ कोविंद का उत्तर प्रदेश आगमन प्रदेशवासियों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह उनकी जन्मभूमि भी है और उनकी कर्मसाधना से जुड़ी भूमि भी। उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति की आत्मकथा का हिंदी संस्करण लखनऊ में विमोचित होना गौरव का विषय है। इससे हिंदी भाषी पाठकों, विशेषकर युवाओं और विद्यार्थियों को उनके जीवन संघर्ष और सार्वजनिक सेवा के अनुभवों को जानने का अवसर मिलेगा।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति के रूप में पांच वर्ष तक देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की जिम्मेदारी निभाई। उनके जीवन से परिश्रम, सादगी, दृढ़ संकल्प और कर्तव्यनिष्ठा की सीख मिलती है।
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