20 अक्टूबर को सुबह 9:34 बजे तक नवमी तिथि
लखनऊ। शारदीय नवरात्रि में महाअष्टमी और महानवमी के अवसर पर कन्या पूजन का विशेष धार्मिक महत्व है। इन दिनों श्रद्धालु छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका पूजन करते हैं और उन्हें भोजन कराकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस बार नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथियों को लेकर श्रद्धालुओं के बीच असमंजस की स्थिति है। काशी पंचांग के अनुसार, महाअष्टमी का कन्या पूजन 18 अक्टूबर को और महानवमी का कन्या पूजन 19 अक्टूबर को किया जा सकता है। नवमी तिथि 20 अक्टूबर की सुबह 9:34 बजे तक रहेगी।
स्वास्तिक ज्योतिष केंद्र, अलीगंज, लखनऊ के ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के अनुसार, आश्विन शुक्ल पक्ष की महाअष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 5:54 बजे से प्रारंभ होकर 19 अक्टूबर की सुबह 6:53 बजे तक रहेगी। ऐसे में श्रद्धालु 18 अक्टूबर को महाअष्टमी का व्रत, पूजन और कन्या पूजन कर सकते हैं।
वहीं, महानवमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 6:53 बजे से शुरू होकर 20 अक्टूबर को सुबह 9:34 बजे तक रहेगी। इस आधार पर महानवमी का कन्या पूजन 19 अक्टूबर को किया जा सकता है। जो श्रद्धालु नवमी तिथि में 20 अक्टूबर को कन्या पूजन करना चाहते हैं, वे सुबह 9:34 बजे तक यह धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं। इसके बाद दशमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी।
कन्या पूजन के बिना अधूरा माना जाता है नवरात्रि अनुष्ठान
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। महाअष्टमी और महानवमी पर कन्या पूजन को इस साधना का महत्वपूर्ण अंग माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दो से दस वर्ष तक की कन्याओं को देवी के विभिन्न स्वरूपों का प्रतीक मानकर उनका पूजन किया जाता है। नौ कन्याओं को मां नवदुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक मानने की परंपरा है। इनके साथ एक बालक को भैरव स्वरूप मानकर भोजन कराने की भी मान्यता है।
कन्या पूजन के दौरान सबसे पहले कन्याओं के चरण धोए जाते हैं। इसके बाद उन्हें आसन पर बैठाकर तिलक लगाया जाता है और चुनरी या अन्य उपहार भेंट किए जाते हैं। परंपरा के अनुसार, कन्याओं को हलवा, पूरी और चने का प्रसाद खिलाया जाता है। भोजन कराने के बाद उन्हें दक्षिणा देकर सम्मानपूर्वक विदा किया जाता है।
मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ कन्या पूजन करने से मां भगवती प्रसन्न होती हैं। इससे परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली आने की कामना की जाती है। कन्या पूजन नारी शक्ति के सम्मान और बालिकाओं के प्रति आदर व्यक्त करने का भी प्रतीक है।
20 अक्टूबर को विजयादशमी और व्रत पारण
ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के अनुसार, 20 अक्टूबर को सुबह 9:34 बजे नवमी तिथि समाप्त होने के बाद दशमी तिथि प्रारंभ होगी। इसी दिन व्रत का पारण, दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन और विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा। श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र में प्रचलित पंचांग और पूजा की परंपरा के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान करने चाहिए।
ज्योतिषाचार्य: एसएस नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केंद्र, अलीगंज, लखनऊ।





















