चंदौली। धान की फसल में सैनिक कीट का प्रकोप किसानों की चिंता बढ़ा सकता है। खासकर बाली निकलने की अवस्था में यह कीट फसल को नुकसान पहुंचाता है, जिससे पैदावार प्रभावित होने की आशंका रहती है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी विनोद कुमार यादव ने किसानों को सतर्क रहने और खेतों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है।
उन्होंने बताया कि सैनिक कीट रात्रिचर होता है। इसकी भूरे रंग की सूड़ियां दिन में धान के किल्लों के बीच या जमीन की दरारों में छिपी रहती हैं। शाम होते ही ये बाहर निकलकर पौधों पर चढ़ जाती हैं और पत्तियों व बालियों को काटकर नीचे गिरा देती हैं। इस कीट की सूड़ियां ही फसल को नुकसान पहुंचाती हैं। इसलिए समय रहते इसकी पहचान और रोकथाम जरूरी है।
प्रकाश प्रपंच और खेत की सफाई से करें बचाव
जिला कृषि रक्षा अधिकारी के अनुसार, खेतों में प्रकाश प्रपंच लगाकर कीट के पतंगों को नष्ट करने में मदद मिल सकती है। किसानों को खेतों की मेड़ों को साफ रखने की भी सलाह दी गई है, ताकि सूड़ियों को छिपने की जगह न मिले। यदि बालियों को काटती हुई सूड़ियां दिखाई दें तो खेत में जगह-जगह घास-फूस के छोटे ढेर लगाए जा सकते हैं। इनमें छिपने वाली सूड़ियों को एकत्र कर नष्ट किया जा सकता है।
प्रकोप बढ़ने पर विशेषज्ञ की सलाह से करें दवा का इस्तेमाल
विनोद कुमार यादव ने बताया कि सैनिक कीट का प्रकोप अधिक होने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से अनुशंसित कीटनाशकों में से किसी एक का निर्धारित मात्रा में प्रयोग किया जा सकता है। इनमें क्लोरपाइरीफॉस 50 प्रतिशत एवं साइपरमेथ्रिन 5 प्रतिशत ईसी की 45 मिलीलीटर, इमामेक्टिन बेंजोएट एसजी की 8-10 ग्राम, थियामेथोक्सम 12.6 प्रतिशत एवं लैम्ब्डा-साइहलोथ्रिन 9.5 प्रतिशत जेडसी की 10 मिलीलीटर या फ्लुबेंडियामाइड एवं डेल्टामेथ्रिन एससी की 8 मिलीलीटर मात्रा प्रति टंकी शामिल है। फेनवेलरेट 0.4 प्रतिशत पाउडर का प्रयोग 10 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से बताया गया है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि कीट की सही पहचान और प्रकोप की स्थिति के अनुसार ही दवा का चयन करें। कीटनाशक के पैकेट पर दिए गए निर्देशों का पालन करें और निर्धारित मात्रा से अधिक दवा का इस्तेमाल न करें। जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर ही फसल पर छिड़काव करें।





















