ज्योतिषाचार्य जया सिंह
भारत एक कृषि प्रधान देश है ,यहां पर सामयिक वर्षा का बहुत अधिक महत्व होता है ,अच्छी पैदावार के लिए और देश की अर्थव्यवस्था के लिए हमें काफी हद तक वर्षा पर निर्भर करना पड़ता है महर्षि वराह- मिहिर ने अपनी रचना बृहत -संहिता में वर्षा और मौसम पर भविष्यवाणी करने के लिए अनेक प्रकार के सिद्धांत दिए हैं I
भारत में वर्षा की शुरु -आत —– जब सूर्य मिथुन राशि में 6 अंश और 40 कला पर आता है अर्थात आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करता है जो लगभग 22 जून का समय होता है उसके अनुसार कुंडली बनाई जाती है जिससे पूरे वर्ष किस प्रकार की वर्षा होगी और पूरे भारतवर्ष में कहां-कहां अधिक वर्षा होगी और कहां-कहां कम वर्षा होगी का पता लगाया जाता है साथ ही साथ जब सूर्य कन्या राशि में 10 डिग्री आगे बढ़ जाता है तो वह मानसून के समाप्ति का समय माना जाता है।
इसके अलावा हम आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष को जब चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है ,तो उसकी भी कुंडली बनाई जाती है और उसके माध्यम से भी यह देखा जाता है कि इस बार वर्षा कैसी होगी ।
मेदनी ज्योतिष में आर्द्रा प्रवेश कुण्डली के आधार पर सप्त नाडी चक्र बनाया जाता है== जिसके द्वारा विशेष नक्षत्र के समूहों को विशेष वर्गों में बांटा गया है जो पूर्वानुमान लगाने में बारिश की सटीक और महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
22 जून 202612:25 :37 दिल्ली— आर्द्रा प्रवेश की कुंडली


1- कन्या लग्न, 2- कन्या राशि ,3-लग्न उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र और चंद्रमा हस्त नक्षत्र में,4-शुक्ल अष्टमी तिथि,5-सोमवार का दिन,6 – वारियान योग,7- बाव करण ,8- राशि पाया स्वर्ण ,9-नक्षत्र पाया चांदी
10- सप्त नाड़ी चक्र में – मंगल प्रचंड नाड़ी में विराजमान है ,जिसको यम- नाड़ी या दक्षिण नाड़ी कहा जाता है ,गर्मी और गर्म हवाओं का सूचक है ।
11- शनि ग्रह दहन नामक नाड़ी में विराजमान है ,यह भी यम नाड़ी या दक्षिण नाड़ मानी जाती है -जो की गर्म और गर्म हवाओं का सूचक है ।
12-सूर्य और चंद्र ग्रह सौम्य नाड़ी में विराजमान है यहमौसम में बदलाव तथा मानसून की पहली वर्षा के सूचक है ।
13- बुध और लगन नीर नाड़ी में विराजमान है —जैसा कि नाम से ही ज्ञात होता है कि यह बारिश के प्रधान नाड़ी में स्थित है
14-शुक्र , गुरु और राहु जल नामक नाड़ी में विराजमान है ,जो कि वर्ष के सूचक हैं ।
15- केतु ग्रह अमृत नामक नाड़ी में विराजमान है ,जिसे शीतल वर्गीकरण में रखा गया है ,जिसका अभिप्राय है अत्यधिक वर्षा ।
इस प्रकार से यह कुंडली भीषण गर्मी के साथ अत्यधिक उमस के साथ अत्यधिक वर्षा को पूरे भारतवर्ष में दिख रही है
कुंडली आर्द्रा प्रवेश की कुंडली पूरे विश्व के लिए मानी जाए तो एल- नीनो का प्रभाव व्यापक रूप से इस वर्ष 2026 में जुलाई से दिखाई देने लगेगा ।
मेदिनी ज्योतिष की एक बहुत प्रमुख पुस्तक भद्रबाहु संहिता जिसमें अतिशय बारिश के जो ग्रहों के संयोजन हैं, जैसे– जब -बुध ,शुक्र, गुरु एक राशि में रहते हो ,शुक्र गुरु से आगे रहता हो तो अत्यधिक बारिश होती है ।सूर्य यदमंगल से आगे रहता है, आर्द्रा प्रवेश में तो अतिशय बारिश होती है बुध के आगे शुक्र होने पर महा- वृष्टि का सूचक है, यह सारे ग्रहों के संयोजन यहां पर आर्द्रा प्रवेश कुण्डली में मौजूद है तो सामान्य से अत्यधिक बारिश होगी निश्चित है।
अतः पूर्वी भारत- बंगाल, बिहार, असम,त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड, काशी उत्तर प्रदेश में अच्छी बारिश के संकेत है उत्तम कृषि होगी ।
उत्तरा- खंड,उत्तरी बिहार,पूर्वोत्तर प्रदेशों में मंगल के प्रभाव के कारण विद्युत प्रकोप से हानि और प्रचंड वायु के प्रकोप से हिमाचल आदि प्रदेश में भू -स्खलन की समस्या उत्पन्न होगी जिससे कृषि प्रभावित होगी ।
दक्षिणी, उत्तरी- उत्तर प्रदेश ,पंजाब,राजस्थान ,दिल्ली, हरियाणा में वायु वेग के साथ यत्र -तत्र सर्वत्र व्यापक वर्षा होगी।
दिल्ली में भारी बाढ़ के संकेत दिखाई देते हैं कुंडली और नक्षत्र के माध्यम से
पश्चिमी भारत में गुजरात, राजस्थान,दक्षिण -पश्चिम मध्य प्रदेश ,आंध्र प्रदेश उत्तरी कर्नाटक में वायु वेग के साथ अत्यधिक वर्षा के संकेत है ,महाराष्ट्र का दक्षिणी भाग,गोवा, कर्नाटक, केरल में वायु वेग के आधिक्य के साथ आंधी तूफान के साथ अत्यधिक बारिश के संकेत है, पूर्वी आंध्र प्रदेश, तेलंगाना ,तमिलनाडु आदि क्षेत्रों में भीषण गर्मी और उमस के साथ बारिश की संभावना ।







