आदर्श प्रकाश सिंह
आईपीएल का मौजूदा सत्र अब समापन की ओर बढ़ रहा है. अब प्ले ऑफ के मैच खेले जाएंगे. मैं टीमों पर बारीक नजर रख रहा था. मुझे एक बात बहुत अखरी कि लखनऊ सुपर जाएंट्स की टीम ने अर्जुन तेंदुलकर को बाहर बेंच पर क्यों बैठाए रखा. भारत के महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के पुत्र को जब आपने टीम में चुना है तो उसे केवल एक मैच में क्यों उतारा? लखनऊ के इकाना स्टेडियम में 23 मयी को पंजाब सुपर किंग्स के खिलाफ अपने आखिरी मैच में लखनऊ की टीम ने अर्जुन को मौका दिया. उसने चार ओवर में 36 रन देकर एक विकेट लिया. यह प्रदर्शन खराब नहीं कहा जाएगा. इस पर एक पिता के नाते सचिन तेंदुलकर ने जो कहा है वह बहुत भावुक बयान है. उन्होंने अपने बेटे के धैर्य और क्षमता की सराहना की है. सचिन कहते हैं-शाबाश अर्जुन, पूरे सत्र में जिस तरह तुमने खुद को संभाला है, उस पर मुझे गर्व है, तुम आखिरी मैच तक सकारात्मक बने रहे, तुमने जो धैर्य दिखाया है वह सराहनीय है.”
टीम प्रबंधन के मुंह पर यह करारा तमाचा भी है जिसने अर्जुन पर भरोसा नहीं किया. लखनऊ का कप्तान रिषभ पंत खुद पूरे आईपीएल में असफल साबित हुआ. निराशाजनक प्रदर्शन के कारण लखनऊ की टीम अंक तालिका में आखिरी पायदान पर है. जब टीम हार ही रही थी तो नये खिलाड़ी को मौका देने में क्या हर्ज था. मुंबई टीम ने भी जब अर्जुन तेंदुलकर को आईपीएल टीम में शामिल किया था तो मैच खेलने के बहुत कम अवसर दिये. एक युवा खिलाड़ी का आत्मविश्वास तोड़ने के लिए यह काफी है. सभी फ्रैंचाइजी को यह ध्यान रखना चाहिए कि खिलाड़ी को बेंच पर बिठाने के लिए उस पर बोली न लगाई जाए. लखनऊ के टीम प्रबंधन को सबक लेना चाहिए. आशा है भविष्य में ऐसी चूक नहीं होगी.




