हजारों बीघा फसल जलमग्न।
पवहा,दूल्हा, मितरौल, सलेमपुर,गादुरी एवं जमालपुर सहित दो दर्जन गांव के अन्नदाताओं की फसलें हुई बर्बादी के मुहाने पर।
रिपोर्ट- प्रवेंद्र शर्मा
एटा/जलेसर। जनपद की जलेसर तहसील के नोहखास एवं एटा सदर तहसील के निधौलीकलां राजस्व क्षेत्र के सीमावर्ती क्षेत्र से होकर गुजरने वाली अरिंद नदी का बीते सप्ताह जलस्तर यकायक बढ़ जाने से परेशान किसानों की चिन्ताए फिर बढ़ गई। सोमवार को सुबह से हो रही बरसात से अरिंद नदी का जलस्तर पुनः बढ़ गया है । नदी के जलस्तर बढ़ने से जहां नोहखास राजस्व क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गांवों की लगभग तीन हजार बीघा में खड़ी धान की फसल पूरी तरह से जलमग्न हो गई है वहीं निधौली कलां राजस्व क्षेत्र के लगभग डेढ़ दर्जन गांवों की सात हजार बीघा से अधिक खेतों में खड़ी धान एवं मक्के की फसलें जलमग्न हो गई है। स्थिति इतनी बदतर हो गई है कि किसान जलमग्न खेतों में चारपाई बिछाकर मक्के की फसलें काटने को मजबूर बने हुए है। फसलों के जलमग्न हो जाने से लाखों रुपए की फसलें बर्बाद होने की आशंका है। जिससे प्रभावित अन्नदाता एक बार सिंहर उठे हैं। हालांकि शुक्रवार को ऊपर से छोड़े गये पानी का बहाव काफी कम हो जाने से खेतों में हुए जल भराव की स्थिति कम होती देखी गई।
इन गांवों की फसलें हुई जलमग्न
जलेसर। जलेसर तहसील के नोह खास राजस्व क्षेत्र अंतर्गत पवहा,दूल्हा,दयारामपुर, मितरौल,सलेमपुर, नगला उम्मेद, गादुरी तथा जमालपुर आदि गांव प्रमुख हैं वहीं एटा सदर तहसील के निधौलीकलां राजस्व क्षेत्र के चित्तरपुर,दस्तमपुर,गोकुलपुर,फतेहपुर,परतापपुर, मगरौली,
संतीपुर,लहरा,रूपसपुर आदि दर्जनभर अधिक गांव अरिंद नदी में अचानक आए उफान की चपेट में आ गए हैं।
धरातल पर कम कागजो में अधिक हुई नदी की सफाई।
जलेसर। तहसील क्षेत्र के गांव जमालपुर के उमेश पाल सिंह, शेखर प्रताप सिंह , योगेश पाल सिंह,मुकेश कुमार सिंह सहित सलेमपुर, मितरौल ,दूल्हा आदि अनेक किसानों ने बताया कि इस नदी की सफाई कई सालों से नहीं हुई है। किसानों के अनुसार लगभग चार वर्ष पूर्व पवहा, मितरौल, सलेमपुर एवं जमालपुर ग्राप पंचायतों के ग्राम प्रधानों द्वारा मनरेगा अंतर्गत नदी की सफाई कराई गई थी। जो धरातल पर बहुत कम नाम मात्र के लिए तथा कागजों में अधिक हुई थी। सफाई दौरान न तो नदी की पटरी बनाई गई थी और न ही सकरे स्थानों को पूर्ववत साफ किया गया था। और न ही नदियों की मिट्टी उठाई गई।
किसानों को हर वर्ष झेलनी पड़ती है तबाही।
जलेसर। गांव जमालपुर गादुरी,सलेमपुर,मितरौल तथा दूल्हा के किसानों की माने तो अरिंद नदी की कई सालों से सफाई नहीं होने से नदी में पंगुलिया काफी तादाद में हो गई है। जिससे नदी का पानी आगे की ओर नहीं बढ़ पाता है। नियमित सफाई नहीं होने से नदी काफी सकरी हो गई है। गहराई भी निरंतर कम होती जा रही है। जिसके चलते किसानों को हर वर्ष नदी का पानी ओवर फ्लो होने से पहले खेतों में खड़ी फसलों को बर्बाद करता है। और फिर गांव और घरों में घुस जाता है। परिणामस्वरूप किसानों को हर वर्ष नदी के उफान से होने वाली तबाही को झेलना पड़ता है।
क्या कहता है राजस्व विभाग
मौके पर जलमग्न क्षेत्र की क्षति ग्रस्त फसलों का आंकलन करते मिले राजस्व विभाग के लेखपाल रजत कुमार शर्मा ने बताया कि सोमवार को हुई बरसात के बाद नदी का घटता जल स्तर पुनः बढ़ गया है। पानी को कम करने के प्रयास जारी है। दो तीन दिन से जलमग्न फसलों से भी पानी घटता जा रहा था। लेकिन बरसात की वजह से अब थम गया है ।नोहखास राजस्व क्षेत्र की प्रभावित सभी चारों ग्राम सभाओं में लगभग एक हजार से अधिक रकबे में खड़ी फसलें जलमग्न होने का अनुमान है। वह निरंतर प्रभावित क्षेत्र में क्षति ग्रस्त फसलों का आंकलन कर रहे है।






