बलिया में प्राइवेट अस्पतालों पर सवाल: इलाज.. जोखिम का दूसरा नाम?
बवाल के बाद तीन अस्पतालों के चिकित्सक एवं कर्मचारियों पर एफआईआर, अस्पताल सील, जांच शुरू
अखिलानंद तिवारी
बलिया। जनपद में हाल ही में सामने आई तीन अलग-अलग घटनाओं ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पथरी ऑपरेशन के दौरान महिला की मौत, प्रसूता और नवजातों की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु, तथा ऑपरेशन के बाद रेफर किए गए मरीज की जान जाने जैसी घटनाएं स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करती हैं।
देखा जाए तो इन घटनाओं में एक समान पैटर्न दिखाई देता है।
पहला, मरीजों को गंभीर स्थिति में भी बिना पर्याप्त संसाधनों के ऑपरेशन करना। दूसरा, इलाज के दौरान पारदर्शिता की कमी और परिजनों को समय पर सही जानकारी न देना। तीसरा, पैसे की मांग को प्राथमिकता देना और रेफर करने में देरी करना।
पूर्वांचल हॉस्पिटल का मामला तो और भी चिंताजनक है, जहां नवजात बच्चियों के शव बाथरूम के डस्टबिन में मिलने से मानवता को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई। वहीं अपूर्वा हॉस्पिटल और आकाश नर्सिंग होम में भी ऑपरेशन के बाद मौत और फिर हंगामे ने यह संकेत दिया कि कहीं न कहीं चिकित्सा मानकों की अनदेखी हो रही है।
हालांकि प्रशासन ने तीनों मामलों में जांच, एफआईआर और कुछ जगहों पर ओटी/अस्पताल सील करने जैसी कार्रवाई की है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई पर्याप्त है ?
क्या इन अस्पतालों की पहले नियमित जांच होती रही है ?
क्या योग्य डॉक्टर, कर्मचारी और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध थीं ?
स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि बिना निगरानी के ऐसे अस्पताल फल-फूल कैसे रहे हैं ? क्या घटना से पूर्व भी इन अस्पतालों की रूटीन जांच की गई थी ? ग्रामीण और गरीब परिवार भरोसे के साथ इन अस्पतालों में जाते हैं, लेकिन कई बार यही भरोसा उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाता है।
इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि अब केवल जांच और आश्वासन से काम नहीं चलेगा। जिला प्रशासन को ऐसे निजी अस्पतालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी होगी। साथ ही ऐसे कठोर नियम बनाने होंगे, ताकि निकट भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो।
जानकारों की मानें तो जब तक स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसे रुकने की उम्मीद कम ही रहेगी।
अब जरूरत है…
-कड़ी मॉनिटरिंग।
-लाइसेंस और सुविधाओं की नियमित जांच।
-दोषी डॉक्टरों और प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई।
-मरीजों के अधिकारों के प्रति जागरूकता।
1-
अपूर्वा हॉस्पिटल
पथरी ऑपरेशन बना जानलेवा! बलिया के अपूर्वा हॉस्पिटल में महिला की मौत, परिजनों का बवाल
-बलिया शहर के जगदीशपुर स्थित अपूर्वा हॉस्पिटल में पथरी के ऑपरेशन के दौरान 24 वर्षीय महिला की मौत के बाद हड़कंप मच गया। आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर प्रदर्शन किया। पुलिस और प्रशासन के समझाने के बावजूद लोग कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे, जिसके बाद मामले में कई डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
2-
पूर्वांचल हॉस्पिटल
डस्टबिन में मिले जुड़वा नवजातों के शव!
बलिया के पूर्वांचल हॉस्पिटल में जच्चा-बच्चा मौत से सनसनी
-बलिया के महिला अस्पताल रोड स्थित पूर्वांचल हॉस्पिटल में एक प्रसूता और उसकी जुड़वा बच्चियों की मौत के बाद सनसनी फैल गई। मामला तब और गंभीर हो गया जब नवजात बच्चियों के शव अस्पताल के बाथरूम में डस्टबिन के पास मिले। परिजनों के हंगामे के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील कर दिया है।
3-
आकाश नर्सिंग होम..
ऑपरेशन के बाद बिगड़ी हालत, रेफर होते ही मौत! आकाश नर्सिंग होम पर लापरवाही का आरोप
बलिया के जिराबस्ती स्थित आकाश नर्सिंग होम में ऑपरेशन के बाद एक प्रसूता की हालत बिगड़ने और वाराणसी रेफर के दौरान मौत हो जाने से परिजनों में आक्रोश फैल गया। हंगामे के बीच स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील कर दिया, जबकि डॉक्टर को पुलिस अपने साथ ले गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही और पैसे की मांग का गंभीर आरोप लगाया है।




