चंदौली में अपंजीकृत खरपतवारनाशी ‘साईक्लोसिनोंन’ के निर्माण, भंडारण और खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। शासन के निर्देश पर जिला कृषि रक्षा अधिकारी विनोद कुमार यादव ने जिले के सभी कीटनाशी विक्रेताओं को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रतिबंधित रसायन का कारोबार या भंडारण करते पाए जाने पर संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी के मुताबिक, ‘साईक्लोसिनोंन’ एक अपंजीकृत चयनात्मक अंकुरण पूर्व खरपतवारनाशी है। इसकी आपूर्ति कुछ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। इसे देखते हुए कृषि विभाग ने निगरानी बढ़ाने का निर्णय लिया है। विभाग की ओर से जिले में कीटनाशी विक्रेताओं की दुकानों और गोदामों पर नजर रखी जाएगी, ताकि प्रतिबंधित उत्पाद की खरीद-बिक्री पर रोक लगाई जा सके।
अधिकारी ने बताया कि अपंजीकृत रसायन का विक्रय और भंडारण कीटनाशी अधिनियम-1968 तथा कीटनाशी नियमावली-1971 के प्रावधानों का उल्लंघन है। ऐसे रसायनों के अनियंत्रित इस्तेमाल से मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही मिट्टी की उर्वरता को भी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। इसलिए किसानों और विक्रेताओं को ऐसे उत्पादों के इस्तेमाल और कारोबार से बचने की सलाह दी गई है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी विनोद कुमार यादव ने सभी कीटनाशी विक्रेताओं को अपने प्रतिष्ठानों और गोदामों से इस उत्पाद को तत्काल हटाने तथा इसकी खरीद-बिक्री पूरी तरह बंद करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि औचक निरीक्षण के दौरान किसी दुकान या गोदाम में यह रसायन मिलने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रतिबंध का पालन सुनिश्चित कराने के लिए कृषि विभाग निगरानी जारी रखेगा।





















