सुबह बिस्तर से उठते ही या कुछ देर पैदल चलने के बाद अगर पैरों के तलवों में तेज दर्द महसूस होने लगे, तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार यह दर्द इतना बढ़ जाता है कि रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाता है। मेडिकल भाषा में पैरों के अगले हिस्से में होने वाले इस दर्द को मेटाटार्सलजिया कहा जाता है। शारदा हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. भुमेश त्यागी के अनुसार, इस परेशानी के पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं।
किन वजहों से होता है तलवों में दर्द?
सही फुटवियर न पहनना
अगर जूते या चप्पल पैरों के अनुसार फिट नहीं हैं, बहुत टाइट हैं या उनका सोल बेहद कठोर है, तो चलने के दौरान तलवों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। खासकर ऊंची एड़ी वाले फुटवियर लंबे समय तक पहनने वालों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है।
जरूरत से ज्यादा शारीरिक मेहनत
लगातार दौड़ना, हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज, डांस या खेलकूद जैसी गतिविधियां पैरों पर अधिक भार डालती हैं। इससे तलवों की मांसपेशियों और हड्डियों पर दबाव बढ़ सकता है और दर्द शुरू हो सकता है।
पैरों की बनावट अलग होना
कुछ लोगों के पैर सामान्य आकार के नहीं होते। किसी के पैर सपाट (Flat Feet) होते हैं तो किसी का फुट आर्च अधिक ऊंचा होता है। ऐसी स्थिति में शरीर का वजन बराबर तरीके से नहीं बंटता, जिससे तलवों में दर्द की संभावना बढ़ जाती है।
पैर की उंगलियों की बनावट
अगर उंगलियां सामान्य से लंबी हैं या उनका आकार अलग है, तो जूते पहनने पर उन पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है। इसका असर पूरे पैर और तलवों पर महसूस होने लगता है।
गठिया से जुड़ी बीमारियां
गाउट और रूमेटॉइड आर्थराइटिस जैसी बीमारियों में पैरों के जोड़ों में सूजन और दर्द होना आम बात है। गाउट में अचानक तेज दर्द और लालिमा दिखाई दे सकती है, जबकि रूमेटॉइड आर्थराइटिस में सुबह के समय अकड़न और लगातार दर्द बना रह सकता है।
बढ़ता वजन भी बन सकता है कारण
शरीर का वजन अधिक होने पर पैरों को हर कदम पर ज्यादा भार उठाना पड़ता है। यदि कम समय में तेजी से वजन बढ़ जाए, तो तलवों पर दबाव बढ़ने के कारण दर्द शुरू हो सकता है।
तलवों के दर्द से राहत पाने के तरीके
अगर दर्द लगातार महसूस हो रहा है, तो कुछ दिनों के लिए पैरों को आराम देना सबसे जरूरी है। दौड़ने या भारी व्यायाम से बचें और जरूरत हो तो हल्की गतिविधियां करें। प्रभावित हिस्से पर दिन में दो से तीन बार करीब 10 मिनट तक बर्फ की सिकाई करने से सूजन और दर्द कम हो सकता है। बैठते समय पैरों को थोड़ा ऊंचा रखकर आराम दें, ताकि रक्त संचार बेहतर हो सके। कठोर फर्श जैसे टाइल या कंक्रीट पर नंगे पैर चलने से बचें। हमेशा ऐसे जूते पहनें जो पैरों को सही सपोर्ट दें और जरूरत पड़ने पर हल्के हाथों से पैरों की मालिश भी कर सकते हैं।
कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है?
यदि दर्द कई दिनों तक बना रहे, चलने-फिरने में दिक्कत होने लगे, सूजन बढ़ जाए या पैर लाल और गर्म महसूस हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। सही समय पर कारण का पता लगने से इलाज आसान हो जाता है और भविष्य में होने वाली गंभीर परेशानियों से भी बचाव किया जा सकता है।







