नीट (National Eligibility cum Entrance Test) का रिजल्ट आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला पाने के लिए आखिर कितने अंक चाहिए। हर साल लाखों छात्र अच्छे स्कोर के बावजूद इस उलझन में रहते हैं कि उनका नंबर सरकारी कॉलेज में आएगा या नहीं। दरअसल, इसका कोई एक तय जवाब नहीं होता, क्योंकि कटऑफ हर साल परीक्षा के कठिनाई स्तर, सीटों की संख्या, उम्मीदवारों के प्रदर्शन और काउंसिलिंग प्रक्रिया के आधार पर बदलती रहती है।
अगर All India Quota (AIQ) की बात करें, तो सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए शीर्ष सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने के लिए आमतौर पर काफी ऊंचा स्कोर चाहिए होता है। वहीं अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए अपेक्षाकृत कम अंक पर भी अवसर मिल सकता है। दूसरी ओर State Quota के तहत कटऑफ हर राज्य में अलग-अलग होती है। जिन राज्यों में मेडिकल सीटें अधिक हैं, वहां उम्मीदवारों को कुछ कम अंकों पर भी सरकारी कॉलेज मिलने की संभावना रहती है, जबकि कम सीटों वाले राज्यों में प्रतिस्पर्धा अधिक होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि काउंसिलिंग के दौरान केवल अंकों पर ही नहीं, बल्कि रैंक, श्रेणी (Category), राज्य का डोमिसाइल, सीटों की उपलब्धता और पिछले वर्षों के कटऑफ पर भी ध्यान देना चाहिए। कई छात्र शुरुआती राउंड में सीट नहीं मिलने पर निराश हो जाते हैं, जबकि बाद के राउंड और स्ट्रे वैकेंसी राउंड में भी सरकारी कॉलेज मिलने की संभावना बनी रहती है। इसलिए काउंसिलिंग की हर प्रक्रिया में हिस्सा लेना बेहद जरूरी है।
यदि आपका स्कोर उम्मीद से थोड़ा कम है, तब भी घबराने की जरूरत नहीं है। काउंसिलिंग के सभी राउंड में भाग लें, अपनी पसंद के कॉलेजों को सोच-समझकर भरें और आधिकारिक कटऑफ व सीट मैट्रिक्स पर नजर बनाए रखें। सही रणनीति और धैर्य कई बार छात्रों को उनकी उम्मीद से बेहतर कॉलेज तक पहुंचा देता है। याद रखें, अंतिम फैसला आपके स्कोर के साथ-साथ काउंसिलिंग की पूरी प्रक्रिया पर निर्भर करता है।






