नई दिल्ली। मेडिकल स्टोर से डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली दवाओं की बिक्री को लेकर केंद्र सरकार निगरानी व्यवस्था और सख्त करने की तैयारी में है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने Drugs Rules, 1945 में बदलाव का ड्राफ्ट जारी किया है। G.S.R. 791(E) के तहत प्रस्तावित इस बदलाव में लाइसेंस प्राप्त परिसर में प्रिस्क्रिप्शन पर दी जाने वाली दवाओं की बिक्री के लिए CCTV निगरानी व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। हालांकि, अभी यह केवल ड्राफ्ट है और इसे अंतिम नियम नहीं माना गया है।
प्रस्ताव के मुताबिक, थोक बिक्री को छोड़कर रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर के प्रिस्क्रिप्शन पर दी जाने वाली दवाओं की आपूर्ति CCTV निगरानी के तहत करने की बात कही गई है। मेडिकल स्टोर पर लगाया गया कैमरा इस तरह होना चाहिए कि दवा की बिक्री को बाद में सत्यापित किया जा सके। इसके साथ ही CCTV रिकॉर्डिंग को कम से कम तीन महीने तक सुरक्षित रखने का प्रस्ताव है। यह व्यवस्था खास तौर पर उन दवाओं की बिक्री पर निगरानी मजबूत करने के उद्देश्य से लाई जा रही है, जिनकी बिक्री पर पहले से नियामकीय नियंत्रण है।
सरकार के मुताबिक इस प्रस्ताव का उद्देश्य प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाओं की बिक्री में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना तथा बिना उचित प्रक्रिया के ऐसी दवाओं की बिक्री पर निगरानी मजबूत करना है। अगर यह प्रस्ताव अंतिम नियम के रूप में लागू होता है, तो मेडिकल स्टोर संचालकों को CCTV लगाने और उसकी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की अतिरिक्त जिम्मेदारी उठानी होगी। आम ग्राहक के लिए भी इसका मतलब यह होगा कि दवा की बिक्री से जुड़ी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक अतिरिक्त व्यवस्था मौजूद रहेगी।
फिलहाल मेडिकल स्टोर संचालकों और अन्य संबंधित पक्षों के लिए यह बदलाव प्रस्ताव के स्तर पर है। सरकार ने ड्राफ्ट पर आम लोगों और प्रभावित पक्षों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। अंतिम नियम कब और किस रूप में लागू होगा, यह इस प्रक्रिया के बाद तय किया जाएगा। इसलिए फिलहाल यह कहना सही होगा कि मेडिकल स्टोर पर CCTV की अनिवार्यता की तैयारी चल रही है, लेकिन नियम अभी अंतिम रूप से लागू नहीं हुआ है।





















