अमृत उजाला
नई दिल्ली। जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र का संवैधानिक अधिकार है और केवल प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस की ओर से अत्यधिक बल प्रयोग उचित नहीं ठहराया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सभी संबंधित राज्यों और पुलिस एजेंसियों को निर्देश दिया कि मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग, वायरलेस लॉग, मोबाइल वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों (E-Evidence) को सुरक्षित रखा जाए, ताकि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो सके।
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने हिंसा, पुलिस की कार्रवाई, पत्रकारों पर हमलों और प्रदर्शन के दौरान आपराधिक तत्वों की मौजूदगी जैसे मुद्दे भी उठाए गए। वहीं, दिल्ली पुलिस ने अलग से दावा किया है कि फेस रिकॉग्निशन और रिकॉर्ड की जांच में कई ऐसे लोगों की पहचान हुई जिनके खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं। हालांकि, इन दावों की न्यायिक पुष्टि अभी होना बाकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जिन प्रदर्शनकारियों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, उनके मामलों की समीक्षा कर कानून के अनुरूप राहत देने और रिहाई पर विचार किया जाए। साथ ही, सभी संबंधित राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके साथ नागरिकों के मौलिक अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की भी समान रूप से रक्षा की जानी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई में विभिन्न राज्यों और संबंधित पक्षों के जवाब पर आगे विचार किया जाएगा.







