, विकसित भारत-2047 के लिए स्वस्थ समाज निर्माण पर मंथन
‘न्यूट्रीशन एंड हेल्थ फॉर विकसित भारत-2047’ विषय पर विशेषज्ञों ने संतुलित आहार, स्वस्थ जीवनशैली और न्यूट्रीशन काउंसलिंग सेंटर की आवश्यकता पर दिया जोर
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा सोमवार को “न्यूट्रीशन एंड हेल्थ फॉर विकसित भारत-2047” विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारत सरकार के राष्ट्रीय मिशन आहार क्रांति (उत्तम आहार, उत्तम विचार) के विभिन्न आयामों पर वैज्ञानिक चर्चा हुई तथा संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली को विकसित भारत की आधारशिला बताया गया।
मुख्य वक्ता प्रो. आशीष कुमार सिंह, निदेशक, फार्मेसी इंस्टीट्यूट, बुद्ध डिग्री कॉलेज, गोरखपुर ने पोषण और स्वास्थ्य के गहरे संबंध पर प्रकाश डालते हुए लेमन ग्रास तथा विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन के लाभ बताए। उन्होंने कहा कि संतुलित एवं पौष्टिक आहार रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है और स्वस्थ जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए वनस्पति विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अभय कुमार ने बताया कि ग्लोबल इंडियन साइंटिस्ट एंड टेक्नोक्रेट फोरम (यूएसए), चंद फाउंडेशन गोरखपुर एवं अशोका ग्रुप गोरखपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस गोष्ठी का उद्देश्य पोषण, स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी को युवाओं एवं आमजन तक पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि मधुमेह, मोटापा, कैंसर, लकवा, अनिद्रा और अवसाद जैसी गंभीर बीमारियों के बढ़ते मामलों के पीछे असंतुलित खानपान और बदलती जीवनशैली प्रमुख कारण हैं। विशेष रूप से युवाओं में जंक फूड के बढ़ते प्रचलन पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने स्वस्थ खानपान अपनाने की आवश्यकता बताई।
अतिथियों का स्वागत करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार द्विवेदी ने युवाओं से राष्ट्रीय मिशन आहार क्रांति से जुड़कर स्वस्थ भारत के निर्माण में भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. अजय सिंह ने कहा कि केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भोजन की गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। पौष्टिक भोजन के अभाव में समाज को अनेक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने “न्यूट्रीशन एंड हेल्थ फॉर विकसित भारत-2047” अभियान को समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ, जागरूक और पोषित युवा ही विकसित भारत की मजबूत नींव रख सकते हैं। कुलपति ने विश्वविद्यालय में न्यूट्रीशन काउंसलिंग सेंटर स्थापित करने का सुझाव देते हुए कहा कि प्रत्येक छात्र को उसकी स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप पोषण संबंधी परामर्श उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान, गृह विज्ञान और खाद्य प्रौद्योगिकी विभागों के संयुक्त प्रयास से न्यूट्रीशन क्लिनिक एवं काउंसलिंग सेंटर स्थापित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी स्पृहा सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राकेश पांडेय ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर प्रो. पूजा सिंह, प्रो. रामवंत गुप्ता, डॉ. राजवीर चौहान, डॉ. तुलिका मिश्रा, डॉ. दीपा श्रीवास्तव, डॉ. शंभू कुमार, डॉ. अशोक कुमार, प्रो. परीक्षित सिंह, प्रो. नीरज श्रीवास्तव, प्रो. अखिलानंद राय, डॉ. के. सुनीता, डॉ. मधुकर सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।







